छतरपुर। जिले में विभिन्न विकास परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापितों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना, नेगवां सिंचाई परियोजना, एनटीपीसी, मजगांव और रुंज डैम से प्रभावित परिवारों द्वारा चलाया जा रहा चिता आंदोलन सोमवार को 14वें दिन भी जारी रहा। वहीं आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता का आमरण अनशन 11वें दिन में प्रवेश कर गया।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि परियोजनाओं के नाम पर उनकी जल, जंगल, जमीन और मकान तो ले लिए गए, लेकिन उन्हें कानून के अनुसार ग्राम सभा, आपत्ति दर्ज कराने और पुनर्वास की प्रक्रिया का लाभ नहीं दिया गया। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों द्वारा बार-बार दस्तावेज मांगे जाने के बावजूद उन्हें उपलब्ध नहीं कराए गए।आंदोलन स्थल पर महिलाएं चिताओं और मिट्टी पर लेटकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। वहीं कुछ आंदोलनकारी प्रतीकात्मक रूप से सूली सत्याग्रह और फांसी प्रदर्शन के माध्यम से अपना विरोध जता रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मुआवजा वितरण में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि वास्तविक पात्र और प्रभावित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला, जबकि कई अपात्र लोगों को लाखों रुपये का मुआवजा दिया गया। उनका दावा है कि जिन परिवारों की जमीन, मकान और आजीविका प्रभावित हुई, वे आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।आंदोलनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई लोगों के मकान बिना उचित मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था किए ही तोड़ दिए गए, जिससे बड़ी संख्या में परिवार बारिश के मौसम में बेघर होकर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।फिलहाल इन सभी आरोपों पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आंदोलनकारी अपनी मांगों के निराकरण तक आंदोलन और आमरण अनशन जारी रखने की बात कह रहे हैं।


