पेरिस: कोरोना (Coronavirus) के प्रकोप को कम करने के लिए भारत सहित दुनिया के कई देश लॉकडाउन (Lockdown) अपना रहे हैं. हालांकि, जितना समर्थन इस फैसले को भारत में मिल रहा है, उतना कहीं और नजर नहीं आता. हमारे यहां अधिकांश देशवासियों को 3 मई से आगे लॉकडाउन बढ़ाए जाने पर आपत्ति नहीं है, क्योंकि उन्हें पता है कि कोरोना से बचाव के लिए यह बेहद जरुरी है. लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन के साथ-साथ कई देशों में स्थिति इससे एकदम विपरीत है. यूरोप में COVID-19 की रफ्तार में आई कमी के मद्देनजर लोग लॉकडाउन जैसे कड़े उपायों से मुक्ति चाहते हैं.
एक सर्वेक्षण के मुताबिक, फ्रांस (France) में लॉकडाउन शुरू होने के बाद से पहली बार इसका समर्थन करने वालों की संख्या 50 फीसदी से नीचे आ गई है. फ्रांस सरकार 11 मई से रीओपनिंग की तैयारी कर रही है. इस संबंध में सरकार द्वारा एक प्रस्ताव संसद (Assemblee Nationale) में रखा जाएगा फिर उसपर वोटिंग होगी. सर्वेक्षण के अनुसार, अब केवल 43 प्रतिशत आबादी लॉकडाउन जैसे सख्त उपायों का समर्थन करती है. जबकि पिछले हफ्ते तक यह आंकड़ा 51 फीसदी से ज्यादा था. वहीं, अमेरिका में भी ऐसी आवाजें सुनाई दे रही हैं. वैसे एक तरह से अमेरिकियों ने ही इस पैटर्न की शुरुआत की है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प खुद भी लॉकडाउन के पक्ष में नहीं रहे हैं.
सर्वेक्षण में लॉकडाउन के समर्थन के अलावा यह भी जानने का प्रयास किया गया कि लोग अपनी सरकार से क्या अपेक्षा रखते हैं. इस दौरान 82% ने कहा कि सरकार को मुफ्त मास्क मुहैया कराने चाहिए और तीन चौथाई से ज्यादा ने कहा कि सरकार को सांस्कृतिक और खेल समारोहों पर पूरी तरह रोक लगा देनी चाहिए.
यहां सरकार के साथ
यूरोपवासी लॉकडाउन को लेकर भले ही सरकार के साथ न हों, लेकिन वर्क फॉर्म होम की व्यवस्था पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. उनका भी मानना है कि वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सरकार की यह सोच सही है. सरकार यह भी साफ़ कर चुकी है कि स्कूल और विश्वविद्यालयों को जल्द खोलने में जोखिम है, और इस दिशा में ‘प्रगतिशील और सावधान’ तरीके से आगे बढ़ा जाना चाहिए. स्कूल शिक्षकों के अनुसार, सरकार ऐसा आम जनता की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए कर रही है.
सता रहा यह डर
लोग इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि सार्वजानिक परिवहन से यात्रा के दौरान वह संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं. उनका कहना है कि यदि सब कुछ सामान्य करने की दिशा में जल्द कोई फैसला लिया गया, तो यह जोखिम बना रहेगा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट से यात्रा के दौरान वह संक्रमित हो सकते हैं. वहीं, सरकार मास्क पहनना अनिवार्य करने जा रही है. जल्द ही सार्वजानिक परिवहन से यात्रा करने वालों को मास्क लगाना होगा.
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