लॉकडाउन का जब ऐलान हुआ था तो तमिलनाडु में सिर्फ 26 कोरोना वायरस केस थे. ऐसा लगता था कि तीन हफ्ते में ही राज्य में संक्रमण पर काबू पा लिया जाएगा और सभी केसों को आइसोलेट कर लिया जाएगा. लेकिन जब लॉकडाउन में पहले विस्तार की घोषणा की गई तब तक तमिलनाडु में केस धीरे धीरे बढ़ने लगे थे.
17 अप्रैल को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई पलानीस्वामी ने दावा किया कि तीन दिन के भीतर राज्य में ताजा केसों की संख्या शून्य पर आ जाएगी. लेकिन केस बढ़ते गए. फिर मई आया और केस की संख्या में बेतहाशा वृद्धि होने लगी.

सब्जी बाजार (कोयम्बेडू) के खराब प्रबंधन और चार दिन के ‘सख्त शटडाउन’ से पहले सामान खरीदने के लिए मारामारी ने इस दक्षिणी राज्य में केसों का विस्फोट किया, जबकि तुलना में अन्य राज्यों की स्थिति स्थिर है.
10 मई को दिल्ली को पीछे छोड़ तमिलनाडु सबसे अधिक केस वाले राज्यों की सूची में तीसरे नंबर पर आ गया, दूसरे नंबर वाले गुजरात से उसका फासला थोड़ा ही बचा. और ऐसा कोई संकेत नहीं जिससे कि हर नए केस की संख्या में कमी आती दिखे.

तमिलनाडु की पड़ोसी राज्य केरल जैसे ही एक महीना पहले स्थिति थी, लेकिन मई की शुरुआत से यहां केस बेकाबू हो गए. वहीं केरल ने महामारी की स्थिति पर अच्छी तरह काबू पा लिया.

अप्रैल के शुरू में दिल्ली और तमिलनाडु दोनों ने तबलीगी जमात कलस्टर से समान संख्या में केस देखे- दिल्ली में 1,080 और तमिलनाडु में 1,113. लेकिन तमिलनाडु ने मई में चेन्नई के कोयम्बेडू सब्जी बाजार कलस्टर से निकलने वाले केसों के बड़े उछाल को देखा. राज्य सरकार के मुताबिक यही कलस्टर 1,500 से ज्यादा केस के लिए जिम्मेदार है.

इस सब्जी बाजार से वेंडर्स और ट्रांसपोर्टर्स पूरे तमिलनाडु में गए. इसकी वजह से कम से कम चार जिलों में कलस्टर का विस्तार हुआ. चेन्नई सबसे अधिक प्रभावित हुआ. देश में सबसे ज्यादा केस वाले शहरों में चेन्नई चौथे नंबर पर हैं. तमिलनाडु के कुल केसों में से आधे से ज्यादा चेन्नई से हैं.

हालांकि तमिलनाडु के पक्ष में दो बातें हैं- इसकी कम मृत्यु दर और ज्यादा टेस्टिंग दर. तमिलनाडु में सबसे कम केस मृत्यु दर (कुल पुष्ट केसों की तुलना में मौतों का अनुपात) है जो 1 प्रतिशत से भी कम है.

इसके अलावा तमिलनाडु में टेस्टिंग की संख्या को भी काफी बढ़ाया गया है. ये किसी भी और राज्य से अधिक लोगों का टेस्ट कर रहा है. राज्य का आबादी की तुलना में टेस्टिंग रेट सबसे ज्यादा है. वहीं इसका टेस्ट पॉजिटिविटी रेट कम है.
रुक्मिणी एस की रिपोर्ट

