दतिया। करीब दो साल पुराने शिवम दांगी हत्याकांड में अदालत के फैसले ने मामले की जांच और उसके पीछे की कथित साजिश को लेकर कई अहम तथ्य सामने ला दिए हैं। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश राजेश भंडारी की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर आरोपी मौसम झा को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले में अदालत के सामने पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और एफएसएल रिपोर्ट को महत्वपूर्ण आधार माना गया।मामला 8 सितंबर 2024 की रात का है। पुलिस के मुताबिक शिवम दांगी और राहुल यादव बाइक से उनाव रोड स्थित कमरे की ओर जा रहे थे। हमीर पुर कंजर डेरा के आगे बाइक सवार युवकों ने उन्हें रोक लिया। इसी दौरान फायरिंग की गई। गोली लगने से शिवम दांगी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि राहुल यादव के हाथ में गोली लगी और वह घायल हो गया।घटना के बाद राहुल यादव की रिपोर्ट पर विशाल यादव और राजा परमार के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था। शुरुआती जांच में इन्हीं लोगों पर घटना में शामिल होने का आरोप सामने आया, लेकिन पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ कहानी की दिशा बदलती गई।जांच में सामने आया अहम तथ्यपुलिस ने घटना की पड़ताल के दौरान घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और अन्य तकनीकी जांच को भी आधार बनाया गया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि जिन विशाल यादव और राजा परमार पर शुरुआत में हत्या का आरोप लगाया गया था, वे वारदात के समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे।जांच आगे बढ़ने पर पुलिस के सामने हत्या की एक अलग तस्वीर आई। पुलिस के अनुसार विरोधियों को हत्या के मामले में फंसाने के उद्देश्य से शिवम दांगी की हत्या की साजिश रची गई थी। इस साजिश में मौसम झा, राहुल यादव, आनंद यादव तथा एक नाबालिग के शामिल होने की बात जांच में सामने आई।अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए अदालत में 19 गवाहों के बयान कराए और 45 दस्तावेज प्रस्तुत किए। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ एफएसएल रिपोर्ट को भी अभियोजन ने महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में पेश किया। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल हथियार बरामद किए जाने की बात भी अदालत के सामने रखी।अदालत ने साक्ष्यों को माना महत्वपूर्णसुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर मौसम झा को शिवम दांगी की हत्या का दोषी माना। अदालत ने उसे उम्रकैद के साथ 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं राहुल यादव और आनंद यादव फैसले के समय अदालत में मौजूद नहीं थे। उनके खिलाफ फरारी की कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।इस मामले में अभियोजन की ओर से अधिवक्ता मनोज गुप्ता ने पैरवी की। अदालत के फैसले के बाद यह मामला केवल हत्या की वारदात तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि जांच के दौरान सामने आई कथित साजिश और सीसीटीवी व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भूमिका के कारण भी चर्चा में है।


