- ‘हताश होकर वापस जा रहे हैं मजदूर’
- धीरे-धीरे चीन का विकल्प बनेंगे- गडकरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेगा आर्थिक पैकेज पर टिप्पणी करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि जब ये पैसा मार्केट में आएगा तो लोगों के हाथों में नगदी बढ़ेगी और लोग खर्च करेंगे. इससे लोगों की आय बढ़ेगी और जीडीपी पर भी सकारात्मक असर होगा.
केंद्रीय मंत्री ने आजतक से खास बातचीत में कहा इस पैकेज का इस्तेमाल कर हमें निर्यात बढ़ाना होगा और आयात कम करना होगा. उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के दौरान दुनिया में चीन की जो छवि बन रही है, वो हमारे लिया छिपा हुआ वरदान साबित होगा.
आर्ट ऑफ लिविंग विद कोरोना सीखें
नितिन गडकरी ने कहा कि हमें आर्ट ऑफ लिविंग विद कोरोना सीखना होगा. इसके लिए मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंस का पालन करना, हाथ साफ करना इत्यादि चीजें शामिल हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का ये पैकेज आत्मनिर्भर, सुखी संपन्न भारत की नींव है.
पीटर इंग्लैंड की शर्ट हम बनाते हैं
मध्यम श्रेणी के उद्योगों की क्षमता बताते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि हम दुनिया में शानदार किस्म के कपड़े बनाते हैं. गडकरी ने कहा कि चुनौतियों के बीच हमारा देश कई बार सफलता पूर्वक आगे बढ़ा है.
नागपुर के एक उद्योग का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कपड़ों की बड़ी ब्रांड पीटर इंग्लैंड के शर्ट नागपुर में बनते हैं, मैंने नागपुर के एक शख्स से कहा कि हम पीपीई किट क्यों नहीं बना सकते हैं, इसके बाद उन्होंने पीपीई किट बनाना शुरू कर दिया, उन्हें अनुमति भी मिल गई.
केंद्रीय सड़क मंत्री ने कहा कि चीन से जब पीपीई किट आया तो उन्हें दुख हुआ, आज हम पीपीई किट उत्पादन में आत्मनिर्भर हैं और इसका एक्सपोर्ट भी कर सकते हैं.
1200 रुपये लीटर था अल्कोहल, अब बनाने लगे तो 4 सौ रुपये हो गया
सैनिटाइजर बनाने में भारत की कामयाबी के बारे में उन्होंने कहा कि अल्कोहल की कीमत 1200 रुपये लीटर तक गई, मैंने चीनी मिलों से कहा कि आप भी अल्कोहल बनाइए, महाराष्ट्र में कई कंपनियां इसे बनाने लगीं इसके बाद इसकी कीमत 400 रुपये लीटर हो गई. अब हम सैनिटाइजर भी बना सकते हैं. उन्होंने कहा कि अब हम वेंटिलेटर भी बना रहे हैं.
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क्या हिन्दुस्तान में चमचों की भी कमी है
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि हमारे यहां अगरबत्ती और आइसक्रीम खाने के चम्मच भी चीन से आते थे. मैंने इस पर आपत्ति जताई तो इंडस्ट्री वाले मुझसे नाराज हुए, मैंने कहा कि मैं नहीं मानूंगा, इसके बाद मैंने उनसे मजाक में कहा कि क्या हिन्दुस्तान में चमचों की भी कमी है कि वो भी हम इंपोर्ट करेंगे. आज हमारे देश में चमचे भी तैयार हो रहे हैं, अगरबत्ती का 4 हजार करोड़ का आयात है, अब मेरी इंडस्ट्री वालों से बात हुई है उन्होंने कहा अब हम खुद इसका उत्पादन करने में सक्षम हैं और हमारे 4000 करोड़ रुपये बचेंगे.
हताश होकर वापस जा रहे हैं मजदूर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मजदूरों का एक बड़ा वर्ग चला जा रहा है, क्योंकि रोजगार ना मिलने की वजह से वे हताश हो गए. इसलिए निराश होकर वे जाने लगे. मेरा विश्वास है कि इकोनॉमी पटरी पर आते ही वे फिर से आएंगे.
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लिवाइस खरीदती है हमारा डेनिम
नितिन गडकरी ने कहा कि हमारे खादी ग्रामोद्योग द्वारा बनाए गए डेनिम को अंतरराष्ट्रीय कंपनी लिवाइस खरीदती है. हमारे हैंडलूम, हनी और खादी प्रोडक्ट का उत्पादन हम बढ़ा रहे हैं. हम तकनीक का इस्तेमाल कर प्रोडक्शन बढ़ा रहे हैं. हमें लागत कम करनी पड़ेगी, इसके लिए पावर कॉस्ट, लेबर कॉस्ट को कम करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि पहले देश में बनने वाला मोरवी का टाइल्स प्रसिद्ध था, लेकिन हम तकनीक में पिछड़ गए, एक बार मोरवी वालों ने अपने आपको अपग्रेड किया और वहां का टाइल्स एक बार फिर पूरे देश में जाने लगा.
चीन को टक्कर देने के लिए हमें हर सेक्टर का कलस्टर बनाना पड़ेगा जैसे कि लेदर कलस्टर, फूड कलस्टर, लॉजिस्टिक कलस्टर इत्यादि. इसके लिए हमें तकनीक का सहारा लेकर आगे बढ़ना पड़ेगा, फिर हम दुनिया की अर्थव्यवस्था में चीन को धीरे-धीरे रिप्लेस करने की कोशिश करनी पड़ेगी. चीन बहुत आगे जा चुका है. हालांकि हमें निवेश की वैसी नीतियां बनानी पड़ेगी.
यात्री ट्रेन शुरू करने पर कुछ राज्यों द्वारा विरोध जताने पर उन्होंने कहा कि ये राजनेताओं की फितरत है, अगर हम कुछ नहीं किए होते तो कहते कि यात्रियों के लिए कुछ क्यों नहीं कर रहे हैं, अब जब किया है तो कुछ नेता कह रहे हैं कि ऐसा क्यों किया. गडकरी ने कहा कि ये राजनीति करने का वक्त नहीं है. अगर किसी को विरोध करना है तो वो बाद में आए लोकतांत्रिक मर्यादा में उनका स्वागत है.


