- जमातियों को जबरन क्वारनटीन में रखने का आरोप
- उच्च स्तरीय कमेटी से मामले की जांच कराने की मांग
दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका लगाई गई है, जिसमें तबलीगी जमात के उन सदस्यों को रिहा करने की मांग की गई है जिन्हें ठीक होने के बाद भी क्वारनटीन में रखा गया है. याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक क्वारनटीन का वक्त पूरा होने के बाद भी इनको उनके घर जाने से रोका जा रहा है. याचिका में तबलीगी जमात के लोगों को जबरन क्वारनटीन सेंटर में रखे जाने को लेकर हाई लेवल कमेटी से जांच कराने की भी मांग की गई है. इस वक्त देश के अलग-अलग हिस्सों में कुल मिलाकर 3288 तबलीगी जमात के सदस्यों को क्वारनटीन सेंटर में रखा गया है.
याचिका में कहा गया है कि तबलीगी जमात के जिन लोगों को क्वारनटीन सेंटर में रखा गया है, उनका टेस्ट बी नेगेटिव आया है लेकिन उसके बावजूद उनको सेंटर से बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है. इन लोगों ने प्रशासन के लोगों को भी पत्र लिखा है लेकिन गैर कानूनी तरीके से तबलीगी जमात के लोगों को न सिर्फ बंधक बनाकर क्वारनटीन में रखा गया है, बल्कि सरकार की गाइडलाइंस का भी उल्लंघन किया जा रहा है. इसके अलावा गैरकानूनी तरीके से तबलीगी जमात के लोगों को क्वारनटीन में रखना संविधान के आर्टिकल 14-15 और 21 का भी उल्लंघन है.
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दिल्ली हाईकोर्ट याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने जा रहा है. यह याचिका सोशल वर्कर सबीहा कादरी की ओर से लगाई गई है. इसमें वकील के तौर पर शाहिद अली पेश होंगे. याचिका में कहा गया है कि पूरे देश में 3288 तबलीगी जमात के सदस्यों को क्वारनटीन सेंटर में रखा गया है.
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याचिका में यह भी कहा गया है तबलीगी जमात के जिन लोगों को क्वारनटीन सेंटर में रखा गया है, उनकी कोरोना की रिपोर्ट तीन-तीन बार नेगेटिव आ चुकी है लेकिन उसके बावजूद प्रशासन उनको सेंटर से उनके घर भेजने के लिए तैयार नहीं है. याचिकाकर्ता का कहना है कि आईपीसी के सेक्शन 341 और 342 के तहत प्रशासन के अधिकारियों द्वारा तबलीगी जमात के लोगों को जबरन क्वारनटीन में रखना अपराध की श्रेणी में आता है.

