नेपाल सीमा विवाद को लेकर बॉर्डर पर रहने वाले बोले- जमीन हमारी है, हमारी ही रहेगी – Uttarakhand india nepal border lipulekh kalapani dispute due to china

  • बॉर्डर पर रहने वाले नेपाल के लोग भी भारत को करते हैं सपोर्ट
  • बॉर्डर पर रहने वाले भारतीय बोले- जमीन हमारी है, हमारी रहेगी

पड़ोसी देश नेपाल के साथ हाल ही में पनपे नए सीमा विवाद को लेकर उत्तराखंड में भारत-नेपाल सीमा से लगे गांव के लोगों का साफ-साफ कहना है, “जो जमीन हमारी है वो हमारी ही रहेगी”. एक सड़क निर्माण के साथ भारत और नेपाल के बीच उपजा यह सीमा विवाद अब दिनों-दिन गहराता जा रहा है. नेपाल के द्वारा कालापानी और लिपुलेख क्षेत्र पर अपना दावा करने के बाद इस क्षेत्र में भारत और नेपाल के बीच तनातनी काफी बढ़ गयी है. हालांकि यहां के स्थानीय लोग नेपाल के इस रवैये को चीन की एक चाल भी बता रहे हैं.

कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला पड़ाव धारचूला है. धाराचूला पिथौरागढ़ से लगती भारत और नेपाल सीमा पर बसा पहला बड़ा कस्बा है. आज तक की टीम ने कालापानी और लिपुलेख तक जाने के लिए अपने सफर की शुरुआत पिथौरागढ़ के धारचूला से ही शुरू की थी. सबसे पहले आजतक ने धारचूला के और आसपास से लगे गांवों के लोगों से नेपाल की इस हरकत पर प्रतिकिया ली तो लोगों का साफ कहना था कि भले ही नेपाल से उनके काफी अच्छे रिश्ते हैं पर जहां तक जमीन की बात है वो एक भी इंच अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे.

यह भी पढ़ें: भारत ने दी नेपाल को नसीहत- हमारी संप्रभुता और अखंडता का सम्मान करें

आपको बता दें कि सन 1816 में नेपाल और ब्रिटिश हुकूमत के बीच हुई सुगौली की संधि के तहत कालापानी से निकलकर बहने वाली काली नदी भारत और नेपाल का सीमांकन करती है. इस नदी के एक तरफ भारत है तो दूसरी तरफ नेपाल बसा हुआ है. लेकिन अचानक नेपाल सुगौली की संधि से मुकरकर कालापानी ही नहीं बल्कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा को भी अपना बताने लगा है. स्थानीय निवासी बताते हैं कि सदियों से वे लोग इन सीमाओं पर रह रहे हैं और ये जमीन हमेशा से भारत की ही रही है. लेकिन अचानक नेपाल के बदले रुख से वे भी हैरान हैं.

यह भी पढ़ें: नेपाल ने जारी किया राजनीतिक नक्शा, भारत की इन जगहों को बताया अपना

भारत-नेपाल के इन इलाकों में रहने वाले लोगों के हमेशा से रोटी-बेटी के संबंध रहे हैं. यहां सीमा के दोनों तरफ बसे लोगों की जहां आपस में रिश्तेदारी है वहीं इनके बीच व्यापारिक रिश्ते भी काफी मजबूत रहे हैं. बॉर्डर पर बसे नेपाल के लोग भी नेपाल के अचानक बदले इस सुर से हैरान हैं. वे मानते हैं कि भारत हमेशा से नेपाल का हितैषी ही रहा है. इसी बात को लेकर वे लोग भी भारत को अपना पूरा समर्थन दे रहे हैं. हालांकि कालापानी और लिपुलेख विवाद से उपजी इस तनातनी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों देशों के रिश्ते में खटास जरूर दिखाई दे रही है.

यह भी पढ़ें: कालापानी को नेपाल में दिखाने वाले नक्शे का मनीषा कोइराला ने किया सपोर्ट

भले ही नेपाल लिपुलेख और कालापानी विवाद को उठाकर भारत को आंखें दिखा रहा हो लेकिन नेपाल ये अकड़ किसके इशारे पर दिखा रहा है ये भी पूरे देश को मालूम है. भारत-नेपाल सीमा पर रहने वाले लोग भी मानते हैं कि चीन के संरक्षण में ही नेपाल ये हरकत कर रहा है.

यह भी पढ़ें: नेपाल ने किया मानसरोवर लिंक के उद्घाटन का विरोध, भारत बोला- हमारे इलाके में सड़क

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें

  • Aajtak Android App
  • Aajtak Android IOS




Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here