Edited By Somendra Singh | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

कोरोना वायरस की वैक्सीन पर जीत हासिल करने के लिए पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है। कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ रहे संक्रमण के बीच जहां इसके इलाज प्रक्रिया में भी तरह-तरह की सकारात्मक स्थिति देखने को मिली है, तो वहीं वैक्सीन के लिए किए जाने वाले ट्रायल ने भी जो परिणाम दिए हैं उससे वैज्ञानिकों का हौसला और बढ़ा है। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया में एक यूएस कंपनी ने कोरोना वायरस वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल शुरू कर दिया है। आइए इसके बारे में विस्तारपूर्वक जानते हैं।
यूएस बायो टेक्नोलॉजी कंपनी ने शुरू किया ट्रायल
यूएस की जिस कंपनी के द्वारा इसका ट्रायल किया जा रहा है, उसका नाम नोवावैक्स है। कंपनी को उम्मीद है कि इस ह्यूमन ट्रायल के शुरुआत के बाद अगर यह पूरी तरीके से सफल रहा तो इस साल के अंत तक कोरोना वायरस की वैक्सीन को तैयार करने में बड़ी जीत हासिल हो सकती है।
कंपनी के रिसर्च प्रमुख डॉक्टर ग्रेगोरी ग्लेन ने कहा कि मेलबर्न और ब्रिसबेन में 131 वालंटियर पर यह ट्रायल शुरू हो चुका है। इन लोगों पर वैक्सीन की सेफ्टी और उसके प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा। मेलबर्न के मैरीलैंड स्थित नोवावैक्स हेडक्वार्टर से एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए रिसर्च प्रमुख ने इस बात की भी जानकारी दी कि हम वैक्सीन के संभावित प्रभाव के आधार पर अभी से तैयारी कर चुके हैं। अगर यह प्रभावी तरीके से काम करती है तो हम इस साल के अंत तक बड़े पैमाने पर इसकी खुराक को तैयार करना शुरू कर सकते हैं। आपको बता दें कि नोवावैक्स एक अमेरिकन वैक्सीन विकसित करने वाली कंपनी है। इसका मुख्यालय मैरीलैंड में स्थित है।
एनिमल ट्रायल में दिखे थे सकारात्मक परिणाम
यह वैक्सीन प्री ट्रायल से गुजर चुकी है और जिसमें इसका सकारात्मक परिणाम भी देखा गया है। एनिमल ट्रायल के दौरान इस वैक्सीन ने लो डोज में प्रभावी असर दिखाया था। ग्लेन ने कहा है कि नोवावैक्स इस साल 100 मिलियन डोज बनाने की क्षमता रखता है। हालांकि, जो ह्यूमन ट्रायल अभी किया जा रहा है, इसका परिणाम जुलाई तक सामने आ सकता है। उसके बाद दूसरे चरण के लिए अलग-अलग देशों के हजारों वालंटियर को ट्रायल में शामिल किया जाएगा।
वैक्सीन मुख्य रूप से रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करने के लिए प्रभावी तरीके से काम करेगी और इम्यून सेल्स को प्रेरित करेगी ताकि वह स्पाइक प्रोटीन को पहचान सके। इससे कोरोना वायरस के शरीर में फैल रहे संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी। वायरस मौजूद होने की स्थिति में यह बॉडी के अंदर संक्रमण को मारने के लिए प्रभावी रूप से कार्य कर सकता है। फिलहाल वैक्सीन को इसी संरचना के आधार पर बनाया गया है। इस वैक्सीन को तैयार करने में लगे हुए वैज्ञानिकों की टीम को भी वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल में सफल होने की काफी उम्मीद है।
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