वाशिंगटन: अमेरिका में बढ़ती हिंसा (America violence) को काबू करने के लिए अमेरिकी सेना को भेजने का प्रस्ताव न मानने पर ट्रंप ने गवर्नरोंं पर तंज किया. ट्रंप ने ये प्रस्ताव तब दिया जब जॉर्ज फ्लायड (George Floyd) की हत्या के विरोध प्रदर्शन के बीच प्रदर्शनकारियों ने पांच पुलिस अधिकारियों को गोली मार दी थी.
प्रदर्शनकारियों ने सोमवार देर रात न्यूयॉर्क शहर में दुकानों की खिड़कियां तोड़ दीं और लूटपाट की और लॉस लॉस एंजेल्स के एक स्ट्रिप मॉल को आग लगा दी. अधिकारियों ने कहा कि लास वेगास में एक, और सेंट लुइस में चार पुलिस अधिकारियों को गोली मारकर घायल कर दिया गया.
हिंसक विरोध प्रदर्शन दूसरे सप्ताह भी जारी हैं, ऐसे में हिंसा को रोकने के लिए ट्रंप ने सेना तैनात करने की धमकी दी और हिंसक प्रदर्शनों पर अपनी प्रतिक्रिया के लिए राज्यपालों समेत अमेरिकी अधिकारियों पर तंज किया.
न्यूयॉर्क डेमोक्रेटिक गवर्नर एंड्रयू क्यूमो के संदर्भ में ट्रंप ने ट्वीट किया- ‘ न्यूयॉर्क, लुटेरों, ठगों, वामपंथियों, बर्बरता और अपराध के आगे हार गया है. गवर्नर ने मेरे सुझाव को नहीं माना. न्यूयॉर्क टुकड़े-टुकड़े हो गया.’
Yesterday was a bad day for the Cuomo Brothers. New York was lost to the looters, thugs, Radical Left, and all others forms of Lowlife & Scum. The Governor refuses to accept my offer of a dominating National Guard. NYC was ripped to pieces. Likewise, Fredo’s ratings are down 50%!
— Donald J. Trump (@realDonaldTrump) June 2, 2020
ट्रम्प ने इस बात का कोई सबूत नहीं दिया है कि अमेरिकी शहरों में फैल रही हिंसा के पीछे वामपंथी हैं.
क्यूमो ने कहा कि वह सोमवार को न्यूयॉर्क शहर में हिंसा और लूटपाट से बेहद नाराज थे, और उनका मानना था कि शहर के मेयर और पुलिस बल ने ‘कल रात अपना काम ठीक से नहीं किया’ और मेयर बिल डी ब्लासियो ने समस्या को कम करके आंका.
गवर्नर ने कहा कि उन्होंने राज्य की पुलिस या 13,000 नेशनल गार्ड से राज्य के मेयरों को समर्थन देने की पेशकश की, जो स्टैंडबाय पर हैं. और कहा कि 38,000 मजबूत पुलिस बल के साथ, अशांति दूर करने के लिए न्यूयॉर्क शहर को स्वयं सक्षम होना चाहिए.
डी ब्लासियो ने नेशनल गार्ड को अमेरिका के सबसे बड़े शहर में लाने के विचार पर ठंडा पानी डाल दिया. उन्होंने कहा कि सेना को न्यूयॉर्क शहर की भीड़ को संभालने के लिए प्रशिक्षित नहीं किया गया है.तनाव में लोडेड हथियारों के साथ भयानक चीजें होती हैं.’
नेशनल गार्ड के प्रमुख, जनरल जोसेफ लेंग्येल ने कहा कि सोमवार रात विरोध प्रदर्शन भले ही बढ़ गया था लेकिन अमेरिका में हिंसा कम हो गई थी. उन्होंने कहा कि रात भर में कोई भी गार्ड घायल नहीं हुआ था.
लेंग्येल ने कहा कि 18,000 गार्ड सदस्य 29 राज्यों में कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद कर रहे थे.
पुलिस से झड़प
अमेरिका में 46 वर्षीय अफ्रीकी अमेरिकी, जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे. 25 मई को मिनियापोलिस में जॉर्ज की गर्दन को एक पुलिसकर्मी ने अपने घुटने की नीचे करीब 9 मिनट दबाए रखा था जिससे सांस रुकने की वजह से जॉर्ज की मौत हो गई थी.
44 वर्षीय मिनियापोलिस के पुलिस अधिकारी डेरेक चाउविन जिसने फ्लोयड की गर्दन पर अपना घुटना रखा था, उसपर थर्ड-डिग्री मर्डर और सेकेंड-डिग्री मानव वध का आरोप लगाया गया है. इसमें शामिल तीन अन्य अधिकारियों पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है.
सेंट लुइस में चार पुलिस अधिकारियों को सोमवार को देर रात गोली मार दी गई और उन्हें घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया. सेंट लुइस पुलिस आयुक्त, जॉन हेडन ने कहा कि करीब 200 प्रदर्शनकारी लूटपाट कर रहे थे और अधिकारियों पर आक्रामक होकर गोलियां चला रहे थे.
उन्होंने कहा- ‘ ये क्या चल रहा है? यह कैसे हो सकता है? फ्लॉयड कहीं और मारे गए थे और प्रदर्शनकारी देश भर के शहरों में बवाल मचा रहे हैं.’
पुलिस ने एक बयान में कहा कि लास वेगास में विरोध प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस अधिकारी को गोली मार दी गई, हर तरफ हुई हिंसा में पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, इनमें से एक पुलिसकर्मी जिसे कार से टक्कर मार दी गई थी उसकी हालत गंभीर है.
कोरोना वायरस महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुए देश में विरोध प्रदर्शनों ने नस्लीय तनाव बढ़ा दिया है. मिनेसोटा अटॉर्नी जनरल कीथ एलिसन ने मंगलवार को एबीसी न्यूज को बताया कि वह फ्लॉयड मामले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ सभी आरोपों पर विचार कर रहे हैं और सभी विकल्प मौजूद हैं.
ट्रंप ने फ्लॉयड की हत्या की निंदा की है और न्याय का वादा किया है, लेकिन उन्होंने विरोध प्रदर्शनों को गुस्साई भीड़ में बदल जाने पर उचित कार्रवाई करने का भी वादा किया है. अमेरिका की राजधानी में कानून व्यवस्था को कायम रखने के लिए हजारों सशस्त्र सैनिकों को तैनात किया है और ये भी वादा किया है कि अगर मेयर और गवर्नर इस पर काबू नहीं कर पाते हैं तो वो हर जगह यही करेंगे.
डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन ने मंगलवार को एक भाषण में अमेरिका में नस्लीय विभाजन को खत्म करने की कोशिश की और विरोध प्रदर्शनों पर ट्रम्प की प्रतिक्रिया की कड़ी आलोचना की.
अमेरिका के दर्जनों शहरों में कर्फ्यू है. ये स्थिति पिछली बार 1968 में मार्टिन लूथर किंग जूनियर की हत्या के बाद हुए दंगों के वक्त देखी गई थी.

