कोरोना मौतों के आंकड़े की मैपिंग: TB से ज्यादा लेकिन हृदय रोगों से कम घातक – Mapping corona death count deadlier than tb but less lethal than heart diseases

  • महाराष्ट्र के ट्रेंड्स बाकी देश से अलग, हृदय रोग से ज्यादा कोरोना से मौत
  • देश में कुल मौतों में से 12.6 लाख मौतें होती हैं मेडिकल तौर पर सर्टिफाइड

भारत में 6 जून तक Covid-19 महामारी से 6,600 से अधिक लोगों की मौत रिपोर्ट हुई हैं. डेटा से पता चलता है कि यह आंकड़ा भारत में ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV), मलेरिया, निमोनिया और तपेदिक (TB) जैसी अन्य घातक बीमारियों से होने वाली मौतों की औसत संख्या से अधिक है.

जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रार कार्यालय के मुताबिक भारत में हर साल औसतन 63.6 लाख मौतें (2015-17 का तीन साल का औसत) होती हैं. यानी हर महीने के हिसाब से ये आंकड़ा 5.3 लाख मौतों का बैठता है.

कुल मौतों में से 12.6 लाख मौतें मेडिकल तौर पर सर्टिफाइड होती हैं. इसके मायने हैं कि मौत का कारण साफ होता है. हर महीने मेडिकली सर्टिफाइड मौतों का आंकड़ा 1.05 लाख बैठता है.

हालांकि 2.8 प्रतिशत की केस मृत्यु दर के साथ Covid-19 से होने वाली मौतें कुल मौतों का छोटा सा ही हिस्सा है. लेकिन मौतों के विशिष्ट कारणों का गहराई से विश्लेषण करने पर अलग तस्वीर सामने आती है.

भारत में कोरोना वायरस से पहली मौत कर्नाटक में मार्च में हुई. देश में मार्च में 35 Covid-19 मौतें, अप्रैल में 1,040, मई में 4,098 और जून के पहले पांच दिनों में 1,184 मौतें हुईं.

कितना घातक है कोरोना? एक तुलना

डेटा दिखाता है कि भारत में HIV से औसतन हर महीने 347 मौतें होती हैं. कोरोना वायरस ने अप्रैल में इससे तीन गुणा और मई में 12 गुना अधिक लोगों की जान ली. मलेरिया से भारत में हर महीने औसतन 445 लोगों की मौत होती है. 4,098 मौतों के साथ, Covid-19 की वजह से मई में इससे नौ गुना अधिक लोगों ने दम तोड़ा.

निमोनिया, जो कोरोना वायरस की गंभीर स्टेज का एक लक्षण भी है, भारत में हर महीने औसतन 1,678 लोगों की जान लेता है. वहीं एक और घातक श्वसन रोग तपेदिक की वजह से हर महीने 3,129 लोगों की मौत होती है. मई में Covid-19 से हुई मौतें इन दोनों बीमारियों से होने वाली मौतों की तुलना में बहुत अधिक थी.

भारत को हर महीने मधुमेह (डायबिटीज) से बड़ी संख्या में मौतों का सामना करना पड़ता है. डेटा से पता चलता है कि हर महीने औसतन 4,191 लोग मधुमेह से मरते हैं, जो कि मई में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों से थोड़ा सा ही अधिक है.

हृदय रोग या दिल से जुड़ी बीमारियों का भारत में मेडिकली सर्टिफाइड मौतों का बड़ा हिस्सा होता है. औसतन कुल मेडिकली सर्टिफाइड मौतों में से 33 प्रतिशत सर्कुलेटरी सिस्टम की बीमारियों की वजह से होती हैं.

पल्मोनरी सर्कुलेशन और हृदय रोगों के अन्य दोष भारत में हर महीने औसतन 14,828 लोगों की जान लेते हैं. इस्कीमिक हृदय रोग (जब हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती है) से हर महीने 9,648 लोगों की मौत होती है. अब तक हृदय रोगों से होने वाली मौतों की तुलना में कोरोना वायरस मौतों का आंकड़ा बहुत कम है.

जबकि कोरोनोवायरस मौतों ने समग्र मृत्यु दर को बाधित किया है. विशेषज्ञों का मानना ​​है कि Covid-19 केसों पर अधिक ध्यान गैर-Covid-19 मौतों को बढ़ा सकता है. भारत की Covid-19 एपेक्स रिसर्च टीम (iCART) के एक विशेषज्ञ ने आजतक/इंडिया टुडे को बताया, “सरकार की ओर से हेल्थकेयर का पूरा फोकस Covid-19 मरीजों की तरफ शिफ्ट किए जाने की पॉलिसी ने अन्य गंभीर समकक्ष बीमारियों के मरीजों की स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच कम कर दी है. नतीजतन, एक गैर-Covid-19 मरीज जिसे अत्यधिक देखभाल की आवश्यकता होती है, हो सकता है उसे अस्पताल में भर्ती नहीं किया जा सके. ऐसे में गंभीर समकक्ष बीमारियों वाले मरीजों की उम्मीद से पहले ही मौत हो सकती है.”

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कम से कम दिल्ली में Covid-19 के इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या अन्य रोगों के मरीजों से ज्यादा है. अप्रैल के मध्य में जब महामारी का प्रकोप इतना नहीं फैला था, तब ही गैर-Covid-19 मरीजों ने स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में दिक्कतें पेश आने का हवाला देना शुरू कर कर दिया था.

महाराष्ट्र में अलग ट्रेंड्स

भारत में कोरोना वायरस से कुल 6,348 मौतें (5 जून तक) हुईं. इनमें से अकेले महाराष्ट्र में 2,710 मौतें हुई जो देश में कुल मौतों का 42 प्रतिशत हैं.कोरोना वायरस ने मार्च में महाराष्ट्र में 9, अप्रैल में 423 और मई में 1,765 लोगों की जान ली.

इसके अलावा, राज्य में मेडिकली सर्टिफाइड मौतों का विश्लेषण करने से पता चलता है कि Covid-19 ने मौतों के सभी घातक कारणों, यहां तक कि हृदय रोगों को भी पीछे छोड़ दिया है. महाराष्ट्र में हर महीने औसतन 1,694 लोगों की दिल की बीमारियों से मौत होती है. मई में कोरोना वायरस के कारण मरने वालों की संख्या इससे अधिक थी.

महाराष्ट्र में, मधुमेह से हर महीने 826 लोगों की औसतन मौत होती है. तपेदिक से 691, निमोनिया से 434, दमा से 160 और HIV से 122 लोगों की औसतन जान जाती है. मई में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों की संख्या इनसे कई गुना अधिक है.

एहतियात का नोट

इंडिया टुडे डेटा इंटेलीजेंस यूनिट (DIU) ने 2015-17 के डेटा को ही ध्यान में लिया, क्योंकि वर्ष 2018-19 का उपलब्ध नहीं था. हमने विश्लेषण के लिए तीन वर्षों के डेटा का औसत लिया. क्योंकि महीनावार मौतों का ब्रेकअप मौजूद नहीं था.

साथ ही हमने सिर्फ मेडिकली सर्टिफाइड मौतों या अस्पताल में हुई मौतों पर (अधिकतर शहरी क्षेत्रों में) पर ही विचार किया. डेटा की कमी के कारण अन्य मौतों की बड़ी संख्या पर गौर नहीं किया गया.

नोवेल कोरोनोवायरस अभी भी जारी महामारी है. गतिशील स्थिति वाली महामारी में वायरस की मृत्यु दर की तुलना हमें ठोस और निर्णायक परिणाम नहीं देती है. हर महीने होने वाली मौतों को दिखाने के लिए आंकड़ों का औसत लिया गया है. महीना वार डेटा के अभाव में मौसमी विभिन्नताओं को भी नहीं लिया जा सका. यह कोरोना वायरस के कारण होने वाली त्रासदी को अंडरएस्टीमेट या ओवरएस्टीमेट कर सकता है.

कोरोना वायरस के सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 70 प्रतिशत से अधिक मौतों में मरीजों को अन्य बीमारियां (सह-रुग्णता) भी थीं. ऐसी संभावनाएं हैं कि जिन लोगों की मौत Covid-19 की वजह से हुई, उनकी शरीर में मौजूद अन्य बीमारियों से भी मौत हुई हो सकती है.

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