Coronavirus latest update: coronavirus human trial: कोरोना को हराने में हर एक देश पुरजोर कोशिशें कर रहा है। इसी कड़ी में एक अच्छी खबर आई है। सिंगापुर की एक फर्म आने वाले हफ्ते में इंसानों पर कोरोना को खत्म करने की एक एंटीबाडी का ट्रायल शुरू करने वाली है
Edited By Sakshi Pandya | नवभारत टाइम्स | Updated:

सिंगापुर की एक बायोटेक्नोलॉजी फर्म, Tychan अगले हफ्ते से Covid 19 के उपचार के लिए मोनोक्लोनल एंटीबाडी के ट्रायल की शुरुआत करेगी। इसका पहला ट्रायल स्वस्थ स्वयंसेवकों पर किया जाएगा। इसमें यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि TYO27 कितनी कारगर है? यह मोनोक्लोनल एंटीबाडी या इम्यून सिस्टम प्रोटीन Covid 19 करने वाले वायरस पर टारगेट करता है। शरीर में एंटीबाडी को इन्फेक्शन से लड़ने के लिए बनाया जाता है। मोनोक्लोनल बॉडीज शरीर में मौजूद नेचुरल एंटीबाडी की एक तरह से नकल कर लेता है। रोगियों के इलाज के लिए इसे बड़ी मात्रा में बनाया जा सकता है।
Tychan के अनुसार, फिलहाल ऐसा कोई एंटीबाडी ट्रीटमेंट उपलब्ध नहीं है जो Covid 19 को खत्म कर सके। SARS COV 2 इन्फेक्शन को रोकने के लिए अभी कोई वैक्सीन नहीं आई है। चैनल न्यूज एशिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सिंगापुर में Tychan ऐसी पहली कंपनी है जो इंसानों पर क्लीनिकल ट्रायल की शुरुआत करने वाली है। हालांकि, एंटीबाडी ट्रीटमेंट को बनाने का प्रयास वैश्विक तौर पर किया जा रहा है। हालांकि, वैश्विक तौर पर इस मंगलवार यानि 9 जून 2020 तक एकमात्र Tychan ऐसी कंपनी है, जिसने ऐसी किसी उपचार के लिए रजिस्टर किया है।
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वेंटीलेटर से हटाएगा रोगियों को
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर के अनुसार, इस ट्रायल के बाद आने वाले परिणाम के आधार पर इसे कई तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है। यह इसी फर्म में को-फाउंडर भी हैं। प्रोफेसर Ooi के अनुसार, इसे Covid 19 से पीड़ित लोगों को ठीक करने के लिए और किसी गंभीर बीमारी से बचाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह उन्हें भी दिया जा सकता है जिन्हें गंभीर बीमारी लगने की आशंका है। उन्हें यह देकर सांस से जुड़ी आगे आने वाली परेशानियों से बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया, वो लोग जिन्हें पहले से ऑक्सीजन की जरूरत है, इस ड्रग की मदद से उम्मीद है कि उन्हें वेंटीलेटर की जरूरत नहीं पड़ेगी और जो पहले से ही वेंटीलेटर पर हैं, उन्हें वेंटीलेटर से हटाने में मदद मिलेगी।
Ooi के अनुसार, अगर Covid-19 के लिए यह ट्रीटमेंट काम कर गया तो हम बहुत कुछ बदल पाएंगे। हमें उम्मीद है कि इसके बाद Covid-19 से मरने वालों की संख्या में भारी कमी आएगी और यह लोगों को गंभीर बीमारियों से भी बचाएगा। इस ड्रग को SARS-CoV-2 के लिए कुछ समय के लिए समाधान उपलब्ध करवाने के परिप्रेक्ष्य में भी टेस्ट किया जाएगा। यह हम हेल्थवर्कर्स को भी दे सकते हैं जो कोरोना रोगियों का ध्यान रख रहे हैं ताकि उन्हें इन्फेक्शन न लगे। जो लोग यात्रा कर रहे हैं, वो भी इसका इस्तेमाल कर इन्फेक्शन से बच पाएंगे, यह उम्मीद की जा रही है। इसके फेज-1 का ट्रायल 6 हफ्ते में पूरा होगा।
कोरोना से लड़ने के लिए भारत का क्या स्टेटस?

दुनियाभर में इस समय काफी देश कोरोनावायरस के लिए वैक्सीन बनाने में लगे हुए हैं और इसी बीच भारत में भी चार वैक्सीन तैयार गई हैं, जिनका जल्द ही इंसानों पर ट्रायल शुरू होगा। रिपोर्ट के अनुसार, सभी भारतीय वैक्सीन इस समय तैयार होने के अलग-अलग स्टेजों में हैं। वहीं चार वैक्सीन के लिए दावा किया जा रहा है कि इन्हें जल्द ही इंसान पर टेस्ट किया जाएगा।
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कोरोनोवायरस वैक्सीन विकास के लिए भारत की नोडल एजेंसी बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट की सचिव रेनू स्वरूप ने कहा कि 4 वैक्सीन फिलहाल तैयार होने की एडवांस्ड स्टेज में हैं। 3-6 माह के भीतर ये क्लिनिकल ट्रायल के फेज वन में जाएंगी। इस फेज में वैक्सीन का टेस्ट एक छोटे ग्रुप पर किया जाएगा, जिससे यह पता चल सके कि यह वैक्सीन कितनी ज्यादा सेफ है और कितनी असरदार है या नहीं है।
30 से ज्यादा वैक्सीन पर चल रहा काम
अगर बात कि जाए वर्तमान स्थिति कि तो भारत में 30 से ज्यादा कोरोनावायरस वैक्सीन तैयार होने की अलग-अलग स्टेज पर हैं। बीते सप्ताह प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर के विजयराघवन ने कहा कि इन सभी वैक्सीन में से 20 इस समय अच्छी स्थिति में हैं। हाल ही में, रामदेव के पतंजलि ग्रुप को अपने प्रोडक्ट को प्रशासन द्वारा क्लिनिकल ट्रायल करने के लिए अनुमति मिली है। पतंजलि ग्रुप अपने प्रोडक्ट से इस वायरस को खत्म करने का दावा करता है। पतंजलि ग्रुप अपने आयुर्वेदिक उत्पादों के लिए जाना जाता है और वह इंदौर और जयपुर में टेस्टिंग करेगा।
इसी के साथ सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज को भी कोरोनोवायरस रोगियों पर Pancreatitis दवा Nafamostat का क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने के लिए शुक्रवार को भारतीय प्रशासन द्वारा अनुमति मिली। टोक्यो यूनिवर्सिटी और लाइबनिज इंस्टीट्यूट फॉर प्राइमेट रिसर्च जर्मनी के साइंटिस्ट द्वारा इस वैक्सीन को कोरोनावायरस में इलाज के लिए कारगर माना जा रहा है।
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