नई दिल्ली: वैज्ञानिकों के एक समूह ने सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) को लेकर की गई विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की स्टडी को लेकर सवाल उठाए हैं. डब्ल्यूएचओ ने पहले दो लोगों के बीच की आदर्श दूरी को दो मीटर निर्धारित किया था. लेकिन अब वह इसमें ढील देकर इसे 1 मीटर करने की बात कह रहा है.
डब्ल्यूएचओ के इस शोध पर अब दावा किया जा रहा है कि सोशल डिस्टेंसिंग को दो से एक मीटर करने पर संक्रमण का जोखिम 1.3 प्रतिशत से बढ़कर 2.6 प्रतिशत हो जाएगा. हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि यह शोध अदूरदर्शी है और इसका उपयोग दूरी के मापदंड तय करने में ब्लूप्रिंट के रूप में नहीं किया जाना चाहिए.
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेविड स्पीगेल्टर ने गार्डियन से कहा, “1 मीटर बनाम 2 मीटर पर संक्रमण के जोखिम का विश्लेषण बड़ी सावधानी के साथ किया जाना चाहिए.” उन्होंने आगे कहा, “मुझे इसमें बहुत संदेह है.”
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ओपन यूनिवर्सिटी के एक अन्य शोधकर्ता ने डब्ल्यूएचओ के विश्लेषण को “अनुचित” बताया. उन्होंने कहा इस अनुसंधान का उपयोग “तार्किक रूप में नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि संक्रमण का जोखिम न्यूनतम दूरी 2 मीटर की जगह 1 मीटर करने पर खतरा अधिक है”.
इतना ही नहीं लैंसेट और न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन जैसे ऑनलाइन पोर्टलों पर प्रकाशित शोध पत्रों की सत्यता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ पत्रों को जल्दी में लिखा और प्रकाशित किया जा रहा है, जिससे निष्कर्ष पर पहुंचना और उसे सत्यापित करना मुश्किल हो जाता है.
इतना ही नहीं इन दोनों को हाल ही में खामियां सामने आने के बाद कुछ अध्ययनों को वापस भी लेना पड़ा.
बता दें कि हाल ही में यूनाइटेड किंगडम ने दो मीटर की शारीरिक दूरी के नियम को शिथिल करने की योजना की घोषणा की है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह अध्ययन सवालों के घेरे में है, लिहाजा दूरी में छूट देने के लिए इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए.
ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने हाल ही में कहा कि दो मीटर की दूरी के नियम की समीक्षा की जाएगी.


