नई दिल्ली: नेपाल सरकार जहां चीन के उकसावे पर भारत के खिलाफ सीमा विवाद को हवा दे रही है वहीं नेपाल में बढ़ते भ्रष्टाचार और कोरोना संक्रमण से निपटने में नाकाम केपी ओली सरकार के खिलाफ पूरे नेपाल में जबरदस्त प्रदर्शन हो रहे हैं. नेपाल की जनता ओली सरकार से इस बात से भी नाराज है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए वो भारत के साथ सीमा विवाद कर रही है. भारत नेपाल से सटे नेपाल में स्थित दारचुला में ओली सरकार के खिलाफ जहां रविवार को प्रदर्शन किए गए वहीं पिछले हफ्ते काठमांडू में भी हजारों की संख्या में छात्रों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर कोरोना वायरस महामारी की स्थिति से निपटने की अयोग्यता के लिए सरकार की आलोचना भी की.
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित दोनों देशों के बीच रोटी बेटी के संबध हैं. सीमा पर स्थित इन इलाकों के लोग एक दूसरे से काफी घुले मिले हुए हैं लेकिन जब से नेपाल ने एक नया मैप जारी कर धारचुला के इलाकों पर अपना दावा ठोका है उससे स्थानीय लोग नेपाल सरकार से काफी नाराज हैं. नेपाल में स्थित दारचुला के लोग नेपाल सरकार से इस बात से भी नाराज दिखे कि चीन, नेपाल के आतंरिक मामलों में लगातार हस्तक्षेप कर रहा है और प्रधानमंत्री ओली चीन सरकार के कठपुतली बन चुके हैं.

दारचुला में हो रहे प्रदर्शन में शामिल एक प्रदर्शनकारी के मुताबिक, नेपाल सरकार भ्रष्ट्राचार में शामिल हैं लेकिन नेपाल सरकार इस पर कारवाई न कर चीन की कठपुतली बनी हुई है और चीन नेपाल के आतंरिक मामलों में दखलदांजी कर रहा है.
ज़ी मीडिया की टीम जब सीमा पर ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए गई तो लोग इस बात से काफी नाराज दिखे कि नेपाल चीन के इशारे पर भारत के साथ टकराव मोल ले रहा है.
नेपाल ने जब से भारत के साथ सीमा विवाद शुरू किया है, उसके बाद से पहली बार नेपाल के सेना प्रमुख जनरल पूरन सिंह थापा ने कालापानी के पास के इलाके का दौरा किया. इस महीने के 17 जून को नेपाली आर्मी चीफ के साथ नेपाल पुलिस के मुखिया शैलेन्द्र थापा ने भी भारत नेपाल सीमा का दौरा किया. ऐसा बताया जाता है कि इस दौरे के दौरान नेपाल ने दारचुला में भारत-नेपाल सीमा पर 6 नए बार्डर पोस्ट डुमलिंग, दारचुला, लेकम, लाली, मल्लिकार्जुन और जौलजीबी बनाए जाने का फैसला किया. भारत और नेपाल सीमा पर स्थित काली नदी दोनों देशों के सीमाओं को बांटती है. नेपाल ने भारत से सटते सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है. धारचुला से कुछ किलोमीटर की दूरी पर लिपुलेख पास है जो भारत और चीन सीमा को जोड़ता है.
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, काठमांडू में स्थित चीन की एम्बेसडर Hou Yanqi ने नेपाल को भारत के खिलाफ उकसाने में बड़ी भूमिका निभाई है. Hou Yanqi ने नेपाल के प्रधानमंत्री ओली के अलावा नेपाल के कई बड़े नेताओं से मुलाकात कर उन पर भारत के खिलाफ बयानबाजी करने को कहा था. नेपाल में एम्बेसडर से पहले Hou Yanqi पाकिस्तान के चीनी दूतावास में तैनात थी. सुरक्षा एजेंसियो के मुताबिक, पाकिस्तान और चीन, नेपाल को उकसा कर भारत के खिलाफ एक और फ्रंट खोलने की साजिश में लगे हैं जिससे भारत की मुश्किलें बढ़ाई जा सकें.

नेपाल के Unified Nepal National Front के नेता Phanindra Nepal पिछले कुछ महीनों में लगातार काठमांडू में स्थित पाक दूतावास के साथ साथ चीन दूतावास के अधिकारियों से मुलाकात की थी. जब भारत चीन के साथ लद्धाख को लेकर बातचीत कर रहा है. उसी दौरान नेपाल का भारत के साथ सीमा विवाद को उठाना एक बड़ी साजिश की तरफ इशारा करता है.
देखा जाए तो धारचुला के इसी इलाके से कैलाश मानसरोवर की यात्रा होती है. पिछले महीने ही बनकर तैयार हुई इस सड़क का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था. ये सड़क दिल्ली से सीधे चीन सीमा को जोड़ती है. सड़क बन जाने से भारतीय सेना युद्ध के दौरान रक्षा हथियारों को बिना देरी किए सीमा तक पहुंचा सकती है और यही वजह है कि चीन इस सड़क के बनने से परेशान है.
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