Brazilian judge orders Bolsonaro to ‘behave’ and wear face mask in public | इस देश में कोरोना के 11 लाख मरीज, बिना मास्क के घूम रहे राष्ट्रपति; कोर्ट ने फटकारा

रियो डी जनेरियो: अपनी नासमझी और मनमानी के चलते ब्राजील (Brazil) को सबसे ज्यादा कोरोना (Corona Virus) प्रभावित देशों में शुमार करने वाले राष्ट्रपति राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो (Jair Bolsonaro) को अदालत ने कड़ी फटकार लगाई है. फेडरल न्यायाधीश रेनैटो बोरेली (Renato Borelli) ने प्रशासन को आदेश दिया है कि यदि राष्ट्रपति सार्वजनिक रूप से बिना मास्क के नजर आते हैं, तो उन पर प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाए. 

ब्राजील में कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो इसे लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं. वह रैलियां आयोजित कर रहे हैं, लोगों से हाथ मिला रहे हैं. अधिकांश मौकों पर उन्हें बिना मास्क से देखा जा सकता है. यही वजह है कि अब अदालत को उनकी इस मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए आगे आना पड़ा है.  

हर रोज इतना जुर्माना 
न्यायाधीश रेनैटो बोरेली ने कहा कि अगर बोल्सोनारो नियमों का पालन नहीं करते, तो उन पर प्रतिदिन 2,000 रीसिस (स्थानीय मुद्रा) यानी कि लगभग $387 डॉलर जुर्माना लगाया जाए. एक स्थानीय न्यूज़पेपर के अनुसार, जज राष्ट्रपति को कड़ी फटकार लगते हुए कहा कि उन्हें COVID-19 से बचने के लिए सभी आवश्यक उपायों को अमल में लाना चाहिए, जिससे वह खुद को और अपने आसपास के लोगों को सुरक्षित रख सकें. 

शपथ का दिया हवाला
जज ने आगे कहा, ‘भले ही चिकित्सा-वैज्ञानिक समुदाय के भीतर एसिम्प्टमैटिक यानी बिना लक्षण वाले लोगों द्वारा कोरोना वायरस के प्रसार को लेकर सहमति नहीं है, फिर भी बिना PPE, मास्क के सार्वजनिक रूप से बाहर जाना खतरनाक है. ऐसा करके राष्ट्रपति अपने साथ-साथ दूसरों को भी जोखिम में डाल रहे हैं’. न्यायाधीश ने ब्राजील के राष्ट्रपति पद की शपथ का हवाला देते हुए कहा कि जेयर बोल्सोनारो ने पदभार ग्रहण करते समय संविधान को बनाए रखने, उसकी रक्षा करने, कानूनों का पालन करने और ब्राजील के लोगों के कल्याण की दिशा में काम करने का संकल्प लिया था, इसलिए उन्हें नियमों का पालन करना चाहिए .

11 लाख के पार हुई संख्या
ब्राजील में कोरोना संक्रमितों की संख्या 11 लाख के पार हो गई है और 50,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. यहां कोरोना के अनियंत्रित होने की प्रमुख वजह राष्ट्रपति का इसे गंभीरता से नहीं लेना है. बोल्सोनारो शुरुआत से ही इसे हल्के में लेते रहे हैं. उन्होंने लॉकडाउन जैसे कड़े उपायों का भी खुलकर विरोध किया है. 




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