Exclusive: गीता गोपीनाथ बोलीं- लॉकडाउन से इकोनॉमी तबाह, सुझाए उपाय – Gita gopinath on imf downward revision of india growth forecast tuta

  • इस साल भारत की अर्थव्यवस्था में 4.5 फीसदी गिरावट रहने का अनुमान
  • गीता गोपीनाथ ने कहा कि भारत को तेज रिकवरी के लिए डिमांड बढ़ाना होगा
  • भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए डोमेस्टिक स्तर सुधार की जरूरत

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने बुधवार को भारतीय अर्थव्यवस्था में 4.5 फीसदी तेजी के साथ गिरावट का अनुमान लगाया है. कोरोना वायरस महामारी की वजह से इस ऐतिहासिक गिरावट का अनुमान लगाया गया है.

टीवी टुडे ग्रुप के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल से खास बातचीत में भारतीय मूल की आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा कि इस साल भारत की अर्थव्यवस्था में 4.5 फीसदी गिरावट रहने का अनुमान है. हालांकि उन्होंने साल 2021 में अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौटने की उम्मीद जताई है, इसमें विकास दर के 6 फीसदी रहने का अनुमान है.

जीडीपी में गिरावट के पीछे दो कारण

उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट के अनुमान के पीछे दो वजहें हैं, पहली- लॉकडाउन में बढ़ोतरी की वजह से अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंची है, दूसरी- अर्थव्यवस्था में तेज रिकवरी की संभावना अभी नहीं दिख रही है. हालांकि उन्होंने माना कि कोरोना की वजह से लॉकडाउन का फैसला सही था.

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उन्होंने कहा कि कोरोना से दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं, लेकिन उससे बाहर निकलने में भारत को ज्यादा वक्त लग सकता है. उन्होंने कहा कि जिन देशों ने नकदी अर्थव्यवस्था में झोंक दी है, वो तेजी से रिकवरी करेंगे.

इकोनॉमी में रिकवरी के उपाय

गीता गोपीनाथ ने बताया कि भारत को जल्द रिकवरी के लिए डिमांड बढ़ाना होगा. इसके लिए डायरेक्ट इनकम सपोर्ट एक जरिया है. लोगों के पास अभी खर्च करने के लिए पैसे नहीं हैं. क्योंकि भारत में लॉकडाउन से एक बड़ा तबका प्रभावित हुआ है. इसलिए डिमांड बढ़ाने पर सरकार का फोकस होना चाहिए. दुनिया के कई देशों में यह तरीका अपनाया है, जो सही है.

उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था तभी पटरी पर लौटेगी जब कैश सपोर्ट काम करेगा. ऐसे में सरकार की भूमिका बढ़ जाती है. उसे आम आदमी के हाथों में पैसा पहुंचाने के साथ-साथ MSME को भी मदद करनी होगी.

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उन्होंने बताया कि भारत की जीडीपी में गिरावट के पीछे बढ़ते कोरोना के मामले भी हैं. हालांकि अभी तक भारत ने जो कॉन्टैक्ट ट्रैसिंग की नीति अपनाई है, वो सही है. लेकिन टेस्टिंग बढ़ाने की जरूरत है. अस्पतालों पर सरकार को खर्च करने की जरूरत है.

गीता गोपीनाथ ने कहा कि कोरोना संकट के बीच भारत के पास मैन्युफैक्चरिंग ताकत को भी बढ़ाने का मौका है. लेकिन इसके लिए डोमेस्टिक स्तर पर बड़े बदलाव की जरूरत है. गोपीनाथ ने कहा कि अगर भारत तेजी रिकवरी पर काम करता है तो 2021 में 6 फीसदी जीडीपी हासिल हो सकती है.

अगले साल फिर 6 फीसदी की तेजी

आईएमएफ का यह भी अनुमान है कि 2021-22 में देश में फिर से तेजी की राह पर लौट आएगा और उस साल 6 फीसदी की मजबूत आर्थिक वृद्धि देखने को मिल सकती है. हालांकि उसने अनुमान में कटौती की है. पहले IMF ने कहा था कि वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 7.4 फीसदी की बढ़त होगी. इसी तरह IMF ने पहले यह अनुमान जाहिर किया था कि 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 1.9 फीसदी की बढ़त होगी.

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