वॉशिंगटन: चीन के साथ विवाद (India-China standoff) पर अमेरिका ने एक बार फिर भारत का साथ दिया है. अमेरिका ने कहा है कि बीजिंग की तरफ से बार-बार होने वाले उकसावे से निपटने एकमात्र तरीका है उसका सामना करना. यूएस वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चल रही गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखे हुआ है.
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि हमें मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद है, लेकिन बार-बार उकसावे की बीजिंग आदत से निपटने का एकमात्र तरीका है उसका सामना करना. उन्होंने आगे कहा, ‘विदेशमंत्री माइक पोम्पियो भी कई मौकों पर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि बीजिंग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यधिक आक्रमक नीति अपना रहा है, जो कि परेशान करनी वाली बात है’.
प्रवक्ता ने आगे कहा कि ताइवान स्ट्रेट से शिनजियांग, दक्षिण चीन सागर से लेकर हिमालय और साइबर स्पेस से लेकर अंतरराष्ट्रीय संगठनों तक, हम चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का मुकाबला कर रहे हैं, जो अपने ही लोगों को दबाना और पड़ोसियों को धमकाना चाहती है. इन उकसावों को रोकने का एकमात्र तरीका है बीजिंग का सामना करना.
भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब
गौरतलब है कि चीन की सेना के 29-30 अगस्त की रात को पैंगोंग झील के दक्षिण बैंक क्षेत्र में यथास्थिति बदलने का प्रयास किया था, लेकिन भारतीय सेना ने इस आक्रामक कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दिया. चीन ने 31 अगस्त की रात को भी एक बार फिर घुसपैठ की कोशिश की थी लेकिन भारतीय जवानों ने उसे विफल कर दिया. हैरानी की बात ये है कि चीन की तरफ से ये हरकत उस वक्त हुई जब कमांडर स्तर की बातचीत चल रही थी.
लद्दाख में LAC पर भारतीय सेना ने अपने टैंकों को महत्वपूर्ण इलाकों में तैनात किया. चुशूल और डेमचोक से चीन के हमले की आशंका के बाद ये तैनाती की गई है. चीन की सेना के टैंकों के आगे बढ़ने के बाद भारत ने ये तैनाती की है. पैंगोंग झील पर भारत की स्थिति मजबूत है. भारतीय सेना सभी संवेदनशील क्षेत्रों में आक्रामक रुख बनाए रखेगी. पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे यानी ब्लैक टॉप पर अब भारतीय सैनिक तैनात हैं.

