सामाजिक बहिष्कार होय से दंडित आदमी अउ ओखर परिवार जात ले बाहर होये से गांव म बड़ मुश्किल म पड़ जाथे. गाँव-समाज म कोनो भी आदमी बहिष्कृत परिवार ले न तो कोनो गोठिया सकय ,अउ न ही ओखर ले कोनो प्रकार के व्यवहार रख सकय. ओ बहिष्कृत परिवार ला बोरिंग ले पानी ले बर, तालाब म नहाय अउ निस्तार करे बर, नहावन, सार्वजनिक कार्यक्रम मन म शामिल होय बर, पंगत में संग बइठे के मनाही हो जथे. इहाँ तक कि ओला गाँव के किराना दुकान म समान खरीदने बर, बनी भूती करे बर, नाउ, बर-बिहाव जइसन सामाजिक अउ सार्वजनिक कार्यक्रम ,यहाँ तक अंतिम संस्कार में घलो शामिल होय से मनाही,ओला सुख दुख में आय जाय बर मनाही कर दे जाथे, जेखर कारण परिवार गाँव म एकदम अपमानजनक स्थिति ,मुसीबत म पहुंच जाथे अउ गाँव म रहना मुश्किल हो जाथे. सामाजिक पंचायतअपन बैठका बुला के सामाजिक बहिष्कार ला हटाय बर ओकर ले भारी जुर्माना, अनाज, शारीरिक दंड अउ गाँव छोड़े जइसन मनचाहे आदेस जारी कर देथे.
सामाजिक बहिष्कार के सेती अलग-अलग जगह ले खुदकुशी, हत्या, प्रताडऩा अउ गांव छोड़े के खबर लगातार समाचार म आते रहिथे. एकर बारे म आज तक कोनो मजबूत ,कड़ा कानून नइ बन पाये हे .एखर सेती अइसन मामला म कोनो उचित ,सखत कार्यवाही नइ हो पावय ,न ही येला बन्द करे के कोनो कोशिस हावय.
सामाजिक बहिष्कार के मामला म सही संख्या के नेशनल क्राईम रिकार्ड ब्यूरो, राज्य सरकार, पुलिस विभाग करा अभी तक कोनो रिकार्ड जानकारी नइ हे अइसे मोला जानकारी सूचना के अधिकार के अंतर्गत प्राप्त होय हे. जबकि अइसन घटना हमर प्रदेश अउ देश भर म लगातार होवत हेऔर पेपर ,सोशल मीडिया में भी घलो सुने ,पढ़े बार मिलथे.सामाजिक बहिष्कार के संबंध म सक्षम कानून बनाय खातिर अउ ओ मन ला समाज के मुख्य धारा में दुबारा लाय के कोसिस करे के घलो जरूरत हवय.

