Fraud is rare in US mail-in voting. Here’s how it can be explained | US Election: मेल-इन वोटिंग पर डोनाल्ड ट्रंप की आशंका को विशेषज्ञों ने किया खारिज

वॉशिंगटन: अमेरिका में 3 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव (US President Election 2020) होने हैं, लेकिन अब तक मेल-इन वोटिंग (Mail-In Voting) को लेकर एक राय नहीं है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) जहां इसे खतरा करार दे चुके हैं, वहीं विपक्ष मेल-इन वोटिंग से चुनाव कराये जाने पर जोर दे रहा है. 

ट्रंप का तर्क है कि मेल द्वारा किये जाने वाले मतदान से धांधली की आशंका है. हालांकि, विशेषज्ञों ने इससे इनकार किया है. उनके मुताबिक, मेल-इन वोटिंग पूरी तरह सुरक्षित है और किसी मेल को वोट के रूप में गिने जाने के लिए कई मानदंड निर्धारित हैं, इसलिए गड़बड़ी की आशंका न के बराबर है. 

पिछले चुनाव में भी हुआ था
संयुक्त राज्य अमेरिका में मेल द्वारा मतदान कोई नई बात नहीं है. 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में हर चार में से एक अमेरिकी ने इसी तरह अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. विशेषज्ञों का कहना है कि रूटीन मेथड और अमेरिकी चुनावों का विकेंद्रीकृत स्वरूप मेल बैलेट्स के साथ छेड़छाड़ बहुत कठिन बनाता है. उनके अनुसार, कोरोना संकट को देखते हुए मेल इन वोटिंग को पूरी तरह से अपनाया जाना चाहिए. इससे वोटरों की लंबी लाइन से बचा जा सकेगा, जिससे संक्रमण फैलने के खतरे में कमी आएगी.  

विदेशी ताकतों का डर नहीं
चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी शक्तियों द्वारा नकली मतपत्र को भेजकर चुनाव बाधित करना लगभग असंभव है. क्योंकि यदि बैलट उचित प्रकार के कागज पर मुद्रित नहीं हैं और उन पर विशिष्ट तकनीकी निशान नहीं है, तो उन्हें मतपत्रों की गिनती में शामिल नहीं किया जाता. इसके अलावा, राज्यों के नियमों के मुताबिक वोटरों को लिफाफे के बाहर भी हस्ताक्षर करने होते हैं, जिनका मिलान उनके रिकॉर्ड से किया जाता है.

ट्रैक करने की सुविधा 
करीब 29 राज्य और कोलंबिया जिला मतदाताओं को अपने मतपत्रों को ट्रैक करने की सुविधा देते हैं. इसी तरह, चौदह राज्य और वॉशिंगटन DC अपने वोटरों को यह सुविधा देती है कि यदि वे डाक से मतपत्र नहीं भेजना चाहते, तो वह खुद आकर उसे सौंप सकते हैं. मतपत्र के लिफाफे खोलने के लिए अलग कर्मचारियों को नियुक्त किया जाता है. यानी जो कर्मचारी बैलट स्कैन करते हैं, उन्हें लिफाफे खोलने का काम नहीं दिया जाता. साथ ही पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बाहरी पर्यवेक्षक भी प्रक्रिया पर नजर रखते हैं.

केवल 14 ही मामले
मेल वोटिंग को लेकर चेतावनी देने वाली कंजरवेटिव हेरिटेज फाउंडेशन ने ओरेगन के चुनावी इतिहास को खंगालने के बाद यह पाया है कि 15.5 मिलियन मतपत्रों से मेल-इन वोटिंग के केवल 14 मामलों में धोखाधड़ी की बात सामने आई थी. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी आशंका को 11 राज्यों द्वारा लागू किये गए नियमों को अपनाकर दूर किया जा सकता है, जिसके मुताबिक मतदाता को मतपत्र वापस भेजने से पहले किसी गवाह के हस्ताक्षर भी करवाने होते हैं.

…लेकिन कुछ खामियां भी हैं
दूसरी वोटिंग प्रक्रियाओं की तरह मेल-इन वोटिंग प्रक्रिया में भी कुछ खामियां हैं. 2016 के चुनाव में देरी से पहुंचने, हस्ताक्षर न होने या अन्य कारणों के चलते करीब 1% मतपत्रों को खारिज कर दिया गया था. कुछ राज्यों में यह आंकड़ा 5 फीसदी के बराबर था. कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मेल बैलेट की त्रुटियों को दूर करना ज्यादा मुश्किल हो सकता है. उनके मुताबिक, मेल बैलेट उन लोगों के लिए अतिरिक्त बाधाएं खड़ी कर सकते हैं, जो अंग्रेजी नहीं बोलते या विकलांग हैं.

 

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