Vatican accuses Pompeo of playing politics, Pope Francies refuses to meet him| वेटिकन ने अमेरिका पर लगाया यह आरोप, माइक पोम्पियो से नहीं मिले पोप फ्रांसिस

रोम: कैथोलिक ईसाइयों के लिए धार्मिक आस्था का केंद्र मानी जाने वाली वेटिकन सिटी (Vatican City) से अमेरिका (America) को बड़ा झटका लगा है. पोप फ्रांसिस (Pope Francis) ने अमेरिका पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए विदेश मंत्री माइक पोम्पियो (Mike Pompeo) से मिलने से इनकार कर दिया है.

नहीं मिलने की वजह 
वेटिकन ने बयान जारी करते हुए कहा है कि अमेरिका में इस वक्त चुनाव की तैयारी (US Elections 2020) चल रही है और चुनावी दौर में पोप किसी नेता से मुलाकात नहीं करते. वेटिकन राजनयिक सचिव कार्डिनल पारोलिन (Vatican diplomat Secretary of State Cardinal Pietro Parolin) ने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री ने पोप फ्रांसिस से मिलने के लिए समय मांगा था, लेकिन पोप ने मिलने से इनकार कर दिया. क्योंकि अमेरिकी में चुनाव होने वाले हैं और पोप ऐसे किसी भी देश के नेता से नहीं मिलते जहां चुनावी प्रक्रिया चल रही हो. 

पोम्पियो ने दिया था विवादित बयान
इस हफ्ते की शुरुआत में अपनी रोम की यात्रा के दौरान, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने चीन के मुद्दे पर वेटिकन को लेकर विवादित बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि वेटिकन को चीन का सामना करने के लिए साहस दिखाना होगा. वेटिकन अधिकारियों से मिलने के वक्त भी उन्होंने चीन में धार्मिक स्वतंत्रता पर लगाई जा रही पाबंदी का मुद्दा उठाया था. माइक पोम्पियो ने कहा था कि चीन में बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है. वहां अल्पसंख्यकों परेशान किया जा रहा है. अमेरिकी विदेश मंत्री चाहते थे कि पोप फ्रांसिस इस बारे में कोई बयान दें, ताकि उसे लेकर चीन पर निशाना साधा जा सके, लेकिन पोप ने उनसे मिलने से ही इनकार कर दिया.

दो साल पहले हुआ था समझौता
कैथोलिक ईसाइयों की धार्मिक राजधानी वेटिकन और चीनी सरकार के बीच बिशप की नियुक्ति को लेकर दो साल पहले एक समझौता हुआ था. इस समझौते के अनुसार पोप फ्रांसिस ने चीन द्वारा नियुक्त उन सात बिशप को मान्यता दे दी थी, जिन्हें वेटिकन ने पहले अमान्य घोषित किया था. माना जाता है कि इस समझौते के चलते ही वेटिकन चीन के खिलाफ कुछ बोलने को तैयार नहीं है. जबकि चीन में अल्संख्यकों के साथ किये जा रहे उत्पीड़न से वह भी अच्छे से वाकिफ है.

बयानबाजी पर नाराजगी
वहीं, वेटिकन प्रशासन ने अमेरिकी विदेश मंत्री की बयानबाजी पर नाराजगी जताई है. अधिकारियों का कहना है कि उच्च-स्तरीय बैठक से पहले सोच-समझकर बयान देना चाहिए. वेटिकन का यह भी कहना है कि माइक पोम्पियो चुनाव में फायदे के इरादे से बयानबाजी कर रहे हैं. वह जानबूझकर यह मुद्दा उठाकर 3 नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव अमेरिकी वोटरों को प्रभावित करना चाहते हैं.   




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