मास्को: अजरबैजान (Azerbaijan) और अर्मेनिया (Armenia) के बीच छिड़े युद्ध (Armenia Azerbaijan Conflicts) को शांत करने के लिए रूस (Russia) लगातार कोशिशें कर रहा है. अब एक बार फिर रूस ने दोनों देशें के विदेश मंत्रियों को राजधानी मास्को (Moscow) में वार्ता के लिए बुलाया है. क्रेमलिन (Kremlin) की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (President Vladimir Putin) ने अजरबैजान और अर्मेनिया के विदेश मंत्रियों को मास्को आमंत्रित किया है.
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सैन्य कार्रवाई रोकने का आह्वान
पुतिन ने यह कदम तब उठाया है जब अजरबैजान और अर्मेनिया के बीच लगभग दो सप्ताह से चली आ रही लड़ाई का कोई अंत नहीं दिखाई दे रहा. इस युद्ध में सैकड़ों लोगों की जान चली गई है. रूस के द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि ‘अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव (President of Azerbaijan Ilham Aliyev) और अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोलियन पशियान (Prime Minister of Armenia Nikol Pashinyan) से टेलीफोन पर हुई चर्चा के बाद, रूस के राष्ट्रपति ने नागोर्नो-करबाख संघर्ष (Nagorno-Karabakh conflict) में सैन्य कार्रवाइयों को रोकने का आह्वान किया.’
गिरजाघर में हुआ हमला
वहीं येरेवन ने झड़पें जारी रहने तक दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों के बीच किसी भी बातचीत को खारिज कर दिया है. अर्मेनिया ने गुरुवार को अजरबेजान पर नागोर्नो-करबाख में एक ऐतिहासिक गिरजाघर पर हमला करने का आरोप भी लगाया है. आर्मेनिया ने कहा है कि कई पत्रकार गिरिजाघर में हुए हमले में घायल हो गए हैं.
1994 के बाद सबसे खराब स्थिति
वर्तमान संघर्ष में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं. 1994 के युद्धविराम के बाद से यह सबसे खराब स्थिति है. दोनों तरफ से संघर्ष विराम का उल्लंघन किया जा रहा है. अजरबैजान और अर्मेनिया के रक्षा अधिकारियों ने कहा है कि गुरुवार को भी लड़ाई जारी रही, दोनों पक्षों ने भारी नुकसान होने का दावा किया और एक दूसरे पर असैनिक क्षेत्रों पर हमला करने का आरोप लगाया.
अंतरराष्ट्रीय नेताओं के सारे प्रयास असफल
अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने बार-बार लड़ाई को तत्काल रोकने के आह्वान के बाद भी संघर्ष समाप्त होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं. इस युद्ध में तुर्की की तरफ से अजरबैजान को मिल रहे मजबूत समर्थन ने पश्चिम में आशंका बढ़ा दी है. यह संघर्ष अंकारा में मास्को के साथ भी युद्ध छेड़ सकता है, क्योंकि रूस और अर्मेनिया के साथ एक सैन्य संधि है.
पुतिन और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन सीरिया और लीबिया से करबख तक तुर्की लड़ाकों की कथित तैनाती की निंदा करने वाले नेताओं में लगातार मुखर हैं. ईरान ने बुधवार को इस लड़ाई में ‘आतंकवादियों’ के शामिल होने की चेतावनी दी थी.
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