what to eat in piles disease: बवासीर के रोग में बहुत लाभकारी होती है ‘खेसारी की दाल’ – khesari ki dal is a natural remedy to treat piles disease

अक्सर लोग खेसारी की दाल को अरहर की दाल समझने की भूल कर बैठते हैं। क्योंकि यह देखने में काफी हद तक अरहर की दाल से मिलती-जुलती होती है। आयुर्वेद में खेसारी की दाल के सेवन कई तरह के रोगों का उपचार किया जाता है। इन्हीं में से एक रोग है बवासीर यानी पाइल्स (Piles) डिजीज।

खेसारी की दाल के गुण
-खेसारी की दाल प्रकृति में ठंडी होती है। इसलिए इस दाल का सेवन रात के भोजन में नहीं किया जाता है। मुख्य रूप से दोपहर के भोजन में इस दाल के सेवन का सुझाव दिया जाता है।

-यह दाल स्वाद में हल्की कसैली और मीठी होती है। शरीर में पित्त बढ़ने की समस्या होने पर भी खेसारी के दाल का सेवन किया जाता है। क्योंकि यह दाल पित्त नाशक होती है और शारीरिक शक्ति बढ़ाने का काम करती है।

-अन्य दालों की तरह प्रोटीन और आयरन की खूबियों से भरपूर होती है यह दाल। खास बात यह है कि इस दाल में और इसके तेल में विरेचक गुण पाए जाते हैं। यानी खेसारी का तेल और इसकी दाल पेट के लिए भी बहुत अधिक लाभकारी होती है।

dal-3

खेसारी की दाल के खाने के लाभ

-जिन लोगों को कब्ज की समस्या रहती है, पाचनतंत्र में अक्सर गड़बड़ी होती है, आंतों में अल्सर की समस्या होती है, उन लोगों को खेसारी सीड्स के तेल का उपयोग करना चाहिए। क्योंकि विरेचक गुणों के कारण यह तेल पेट में अपशिष्ट पदार्थों को जमा नहीं होने देता है। इससे कब्ज की समस्या नहीं होती है।

World Tuberculosis Day: टीबी के बारे में जरूर पता होनी चाहिए ये 9 बातें

इन रोगों में लाभकारी होती है
-खेसारी की दाल हड्डियों की कमजोरी दूर करती है। जो लोग अपनी डायट में इस दाल का सेवन करते हैं, उन्हें ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है।

dal2

खेसारी की दाल हड्डियों की कमजोरी दूर करती है

-जिन लोगों को इंटरनल इंफ्लेमेशन की समस्या रहती है, उन्हें भी इस दाल का सेवन करना चाहिए। क्योंकि खेसारी की दाल खाने से शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन को नहीं बढ़ने देता है।

आपको टीबी का रोगी नहीं बनने देंगे ये सीडलेस एप्रीकॉट और खुबानी

-पेट में एसिड बनने की समस्या से ग्रसित लोगों को भी खेसारी की दाल खाने से खास लाभ मिलता है। क्योंकि यह दाल तासीर में ठंडी होती है, इस कारण पेट को शीतलता देने का काम करती है।

-प्राकृतिक और पौष्टिक गुणों से भरपूर होने के कारण खेसारी की दाल में ऐसे औषधीय तत्व पाए जाते हैं, जो बवासीर की पीड़ा को नैचरली कम करते हैं। आप इस रोग की दवाओं के साथ ही अपने भोजन में खेसारी की दाल का सेवन करेंगे तो आपको अधिक लाभ होगा।

पॉप्युलर फास्टिंग फूड है फूल मखाना, नवरात्रि में हर दिन करें इनका उपयोग

Navratri Fasting: दूध और चौलाई की खीर से करें दिन की शुरुआत, बदलते मौसम में नहीं सताएगी सर्दी-गर्मी


Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here