आपको क्या करना है?
-कुट्टू के आटे की पूड़ी, कचौड़ी, पराठा या पकौड़ी इत्यादि बनाते समय आप गाय के शुद्ध देसी घी का उपयोग करें। यदि आप देसी घी नहीं खाना चाहते हैं तो आपको फूड ग्रेड नारियल तेल का उपयोग करना चाहिए।

-ऐसा करने से कुट्टू की गर्म तासीर में संतुलन स्थापित होता है। यदि नवरात्रि में आप हर दिन कुट्टू के आटे से बने भोजन का सेवन करते हैं तो आपको इस भोजन से दो घंटे पहले या दो घंटे बाद में दूध, छाछ या लस्सी का सेवन अवश्य करें।
-दही और छाछ का सेवन आप कुट्टू की पकौड़ी के साथ भी कर सकते हैं। लेकिन मीठी लस्सी और छाछ का उपयोग कुट्टू से बना भोजन करने के कम से कम दो घंटे पहले या बाद में करें।

शरीर रहेगा शांत और शीतल
-गाय के शुद्ध देसी घी, कोकोनट वर्जिन ऑइल और घर पर तैयार किए गए मक्खन में बने कुट्टू से तैयार भोजन को खाने पर व्रत के दौरान शरीर शीतल और मन शांत बना रहेगा।
-दूध, दही, छाछ और लस्सी का सेवन आपके पाचनतंत्र को सही बनाए रखने में मदद करेगा। क्योंकि पूरा दिन अन्न ना खाने के बाद एक समय केवल कुट्टू से बना खाना खाने के कारण कई बार पाचन डिस्टर्ब हो जाता है और व्यक्ति को लूज मोशन की शिकायत हो सकती है। ऐसा कुट्टू की गर्म तासीर के कारण होता है।
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