-नवरात्रि के व्रत 9 दिनों तक रखे जाते हैं। अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों के अनुसार आपके शरीर को पूरी तरह डिटॉक्सिफाई करने के लिए एक सप्ताह का समय पर्याप्त होता है। यानी इन 9 दिनों में आप अपने शरीर के सभी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर शरीर का शुद्धिकरण कर सकते हैं।
फ्रेश मेंटल एनर्जी
-हम जिस तरह का भोजन करते हैं, उसी तरह के भाव हमारे मन में उत्पन्न होते हैं। इस कारण नवरात्रि के व्रत में किए जानेवाले फलाहार का आपके शरीर और मन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। नवरात्र के व्रत के दौरान ना केवल आपका शरीर शुद्ध होता है बल्कि मानसिक शुद्धिकरण भी होता है।
बहुत लाइट और खुश अनुभव करते हैं व्रत करनेवाले लोग
-यदि आप थोड़े भी भक्ति-भाव के साथ नवरात्र के दिनों में दो समय गाय के घी का दीपक जलाकर अपने घर में धूप-दीप के साथ पूजन करेंगे तो आप अपने अंदर एक अलग तरह की शांति का अनुभव करेंगे, जो आपको मानसिक रूप से अधिक मजबूत बनाने और नई ऊर्जा से भरने का काम करेगी।
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पाचनतंत्र की हीलिंग होना
-आपने शायद ही कभी इस बात पर गौर किया हो कि नवरात्र के व्रत करने के दौरान पूरी 7 से 9 दिनों के अंदर आपके पाचनतंत्र की हीलिंग होती है। यानी पाचनतंत्र में जमा अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।
-क्योंकि नवरात्र के दौरान आप जिस फलाहार और सात्विक भोजन का उपयोग करते हैं, वह आपके पाचनतंत्र की आंतरिक सफाई और नसों तथा नाड़ी की हीलिंग का काम करता है।
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बढ़ते वजन को नियंत्रित करते हैं नवरात्र के व्रत
-इस दौरान आंत में आई आंतरिक सूजन, लिवर में आई खान-पान से जुड़ी गड़बड़ियां, घाव, अल्सर इत्यादि प्राकृतिक रूप से ठीक होने लगते हैं। इस तरह यह व्रत आपके पाचन को बेहतर बनाने का भी काम करता है।
बढ़ते वजन को नियंत्रित करना
-जो लोग अपने बढ़ते वजन से परेशान रहते हैं, वे नवरात्र व्रत के दौरान अपने मोटापे पर नियंत्रण लगा सकते हैं। वह भी बिना भूखा रहे। क्योंकि नवरात्र के व्रत में आपको फलाहार, कुट्टू, सिंघाडे़ का आटा और साबूदाना खाने की स्वतंत्रता होती है।
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-इन सभी चीजों को बहुत ही मामूली-सी चिकनाई के साथ तैयार कर आप अपने फैट को कम कर सकते हैं। क्योंकि नवरात्र के व्रत में खाई जानेवाली ज्यादातर चीजें प्राकृतिक रूप से फैट फ्री होती हैं। बस इन्हें रसोई में पकाते समय आप इनके इस गुण को बनाए रखने का प्रयास करें। यानी इन्हें बहुत अधिक तेल या घी में ना बनाएं।
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