Unlocking in Maharashtra increased, so corona testing, IMA said – so fewer cases coming – महाराष्ट्र में अनलॉकिंग बढ़ी तो घटी कोरोना की टेस्ट‍िंग, IMA ने कहा – इसलिए कम आ रहे मामले

महाराष्ट्र में अनलॉकिंग बढ़ी तो घटी कोरोना की टेस्ट‍िंग, IMA ने कहा - इसलिए कम आ रहे मामले

प्रतीकात्मक तस्वीर

त्योहार की भीड़, रफ़्तार से होती अनलॉकिंग के बीच महाराष्ट्र में टेस्टिंग घट रही है. अक्टूबर में राज्य में 18% टेस्टिंग घटी है. IMA, कोविड टास्क फ़ोर्स और महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ने इसे बेहद चिंताजनक बताया है. अक्टूबर में शुरुआती 15 दिनों के आंकड़े देखें तो सितम्बर महीने की तुलना में टेस्टिंग में 18% कमी आयी है. रोज़ाना टेस्टिंग का ऐवरेज 91,000 से 75,000 पर आ चुका है. 17 सितम्बर को जहां 24 घंटों में 99,595 टेस्टिंग दिखी तो 12 अक्टूबर को यही आंकड़ा सीधे 56,058 पर पहुंच गया. महाराष्ट्र में बीते चार हफ़्तों में कोविड मामलों में जो गिरावट देखी गयी, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन उसे कम टेस्टिंग का नतीजा मान रहा है. 

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IMA-महाराष्ट्र के अध्यक्ष डॉ अविनाश भोंडवे कहते हैं, ‘महाराष्ट्र में 17 सितम्बर से केसेस कम दिख रहे हैं, लेकिन अहम ये है कि टेस्टिंग भी कम हुई है. महत्वपूर्ण ये है कि पहले टेस्टिंग कम हुई फिर केसेस के आंकड़े कम आए, टेस्टिंग आंकड़ों के मुताबिक़ चलता तो इतने कम आंकड़े नहीं आते. प्रशासन जिस तरह से टेस्टिंग ट्रेसिंग कम कर रहा है उससे महामारी के आंकड़े और बढ़ेंगे. 

वहीं मुंबई में रोज़ाना टेस्टिंग जहां इस महीने में 16,000 तक पहुंची दिखी थी, वहीं बीते कुछ दिनों से 9 और 11 हज़ार पर सिमटती दिखी है. जितने लोगों की जांच हो रही है उनमें से संक्रमित की संख्या समझने के लिए मुंबई की पॉजिटिविटी रेट देखें तो ये 17.69% है, भारत की दर क़रीब 8% से कहीं ज़्यादा. 

ऐसे में मुख्यमंत्री की ओर से बनाई गई कोविड टास्क फ़ोर्स के वरिष्ठ डॉक्टरों और महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ने मांग की है कि हो सके तो टेस्टिंग दोगुनी हो और पॉजिटिविटी रेट सिंगल डिजिट पर जल्द लाया जाए.

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महाराष्ट्र कोविड टास्क फ़ोर्स के सदस्य डॉ राहुल पंडित ने कहा, ‘टेस्टिंग स्ट्रैटेजी सबसे अहम है, हो सके तो दोगुनी करें, पॉजिटिविटी रेट को सिंगल डिजिट पर लाना ज़रूरी है. 5% तक लाएं तो बहुत अच्छा. हर गली नुक्कड़ पर अगर टेस्ट सेंटर खुल जाएं तो नागरिकों को आसानी हो, ये करना बहुत ज़रूरी है.’

वहीं महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष डॉ शिवकुमार उत्तुरे कहते हैं, ‘मुंबई में जहां हमें बहुत ज़्यादा टेस्टिंग की ज़रूरत है लोगों की भीड़ देखते हुए, हमें पता चल रहा है कि टेस्टिंग कम हुई है, पॉजिटिविटी रेट 17% के आस पास है, इसको 5% से भी नीचे लाना होगा. टास्क फ़ोर्स को भी लगता है 25,000 के क़रीब टेस्टिंग हो लेकिन हम इसके आस पास भी नहीं हैं.’

राज्य की कुल टेस्टिंग में क़रीब 31% ऐंटिजेन रैपिड टेस्टिंग बतायी जा रही है, जिसके नतीजे ज़्यादा भरोसेमंद नहीं माने जाते. कम परीक्षण के बीच एक्सपर्ट्स इसको लेकर भी चिंतित हैं और मांग है कि ज़्यादा से ज़्यादा RT-PCR टेस्टिंग हो.


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