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Home Nation Early release of the culprits of Rajiv Gandhis assassination depends on the Governor of Tamil Nadu: CBI – राजीव गांधी की हत्या के दोषियों को जल्द रिहा करना तमिलनाडु के गवर्नर पर निर्भर : CBI

Early release of the culprits of Rajiv Gandhis assassination depends on the Governor of Tamil Nadu: CBI – राजीव गांधी की हत्या के दोषियों को जल्द रिहा करना तमिलनाडु के गवर्नर पर निर्भर : CBI

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Early release of the culprits of Rajiv Gandhis assassination depends on the Governor of Tamil Nadu: CBI – राजीव गांधी की हत्या के दोषियों को जल्द रिहा करना तमिलनाडु के गवर्नर पर निर्भर : CBI

राजीव गांधी की हत्या के दोषियों को जल्द रिहा करना तमिलनाडु के गवर्नर पर निर्भर : CBI

नई दिल्ली:

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा पाए दोषियों की जल्द रिहाई का फैसला तमिलनाडु के राज्यपाल को करना है, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया. शीर्ष अदालत को दिए एक हलफनामे में, एजेंसी ने कहा कि प्रारंभिक रिहाई का विषय राज्यपाल और याचिकाकर्ता के बीच एक मुद्दा था.  इसमें एजी पेरारिवलन (दोषियों में से एक) और सीबीआई कीकोई भूमिका नहीं है.

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सीबीआई ने शीर्ष अदालत को यह भी बताया कि उन्हें राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से कोई अनुरोध नहीं मिला है, जो पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के पीछे एजेंसी द्वारा की जा रही जांच का ब्योरा मांग रहे हैं. 2018 में तमिलनाडु कैबिनेट ने दोषियों की समय से पहले रिहाई की सिफारिश की थी. निवेदन राज्यपाल के पास लंबित है.

तमिलनाडु सरकार ने इस साल सितंबर में मद्रास उच्च न्यायालय को बताया था कि राज्यपाल के सचिव ने सरकार को सूचित किया है कि “राज्यपाल एमडीएमए की अंतिम रिपोर्ट (बहु-अनुशासनात्मक निगरानी एजेंसी जिसका सीबीआई का हिस्सा है) की प्रतीक्षा कर रही है” दोषियों की समय से पहले रिहाई के फैसले के लिए “.

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इसी तरह की याचिका में जो कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है इसमें सीबीआई ने शीर्ष अदालत से कहा है कि यह राज्यपाल को तय करना है कि दोषियों की सजा की छूट दी जाए या नहीं. केंद्रीय एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया है कि पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के पीछे बड़ी साजिश की जांच जारी है.

सीबीआई का हलफनामा पेरारिवलन की मां द्वारा उन्हें जल्दी रिहा करने की याचिका पर शीर्ष अदालत के नोटिस के बाद आया है. उच्चतम न्यायालय ने इस तथ्य पर नाखुशी व्यक्त की थी कि यह अनुरोध राज्यपाल पुरोहित के पास दो वर्षों से लंबित था. आजीवन कारावास की सजा पाए सात दोषियों में से एक, 46 वर्षीय पेरारिवलन ने सीबीआई की अगुवाई वाली एमडीएमए जांच पूरी होने तक मामले में अपने जीवन की सजा को निलंबित करने की मांग की थी.


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