ayurvedic remedies for cavity and tooth decay: Ayurveda: बिना पैसे खर्च किए दांतों की सफाई के लिए अपनाएं आयर्वेदिक तरीका, बरकरार रहेगी अपनी मुस्कुराहट – five simple ayurvedic ways to clean your teeth in hindi

आंख, नाक और कान की तरह दांत भी हमारे शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जहां जीभ हमें तमाम तरह के स्वादिष्ट पदार्थों के टेस्ट से परिचय कराती है, तो वहीं दांतों के जरिए हम इन पदार्थों को चबाते हैं। लिहाजा दांतों की देखभाल हमारे लिए बेहद आवश्यक है। इनकी सफेदी और अपनी मुस्कुराहट बरकरार रखने के लिए आपको दिन में दो बार ब्रश करना चाहिए।

आयुर्वेद भी दांतों की दो बार सफाई पर जोर देता है। पुराने दौर के लोग अपने दांतों को साफ करने के लिए विशिष्ट पौधों की टहनियों का इस्तेमाल करते थे और देश की तमाम हिस्सों में इस परंपरा का आज भी पालन किया जाता है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि ब्रश करने और आयुर्वेदिक तरीके से दांत साफ करने में एक बड़ा अंतर है। हालांकि, जो लोग आज भी पारंपरिक तरीके को अपनाते हैं उन्हें दांतों की समस्या बेहद कम होती है। जानिए, आखिर क्यों दांतों को ब्रश से साफ करने से बेहतर है आयुर्वेद का पारपंरिक तरीका?

दांतों को साफ करने का पारंपरिक तरीका

जब आधुनिक युग की शुरुआत नहीं हुई थी तब पुराने जमाने लोग अपने दांतों की सफाई के लिए कड़वे पेड़ों जैसे नीम, शीशम, आम और पीपल की टहनियों का प्रयोग करते थे। इनकी कड़वाहट से न सिर्फ मुंह की दुर्गंध दूर होती है बल्कि दांत और मसूड़ों में भी मजबूती आती है। मालूम हो कि कड़वी जड़ी-बूटियां मुंह से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती हैं और सांसों की बदबू से भी लड़ती हैं। कड़वे पेड़ों की टहनियां बैक्टीरियारोधी चिकित्सकीय गुणों से भरपूर औषधि की तरह होती हैं । पेड़ों की दातुन न सिर्फ आपके दांतों को स्वच्छ रखती बल्कि पाचन क्रिया में मदद करती है। साथ ही स्किन संबंधी समस्या से भी निजात मिलती है। दातुन को आप एक देसी यानी नेचुरल माउथफ्रेशनर के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।

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टहनी का उपयोग कैसे करें

आम, नीम, शीशम या पीपल जैसे पेड़ डाल की किसी भी टहनी को तोड़ लें। दातुन के लिए आप 20 से 25 सेंटीमीटर की टहनी होनी चाहिए जो कि आपकी उंगलियों में आसानी से आ जाए। इसके बाद आप टहनी को थोड़ी देर तक चबाएं। जब टहनी की नोक पर हल्के से ब्रिसल निकलने शुरू हो जाएं तो इसे ब्रश की तरह दांतों पर रगड़ें। धीरे-धीरे ये टहनी घिसने लगेगी और ऑटोमैटिक ही ब्रशनुमा बन जाएगी। इसे दांतों के अलावा जीभ पर भी लेकर जाएं। दातुन को आप जितनी देर तक मुंह में रखेंगे उतना ही आपको फायदा होगा। ग्रामीण लोग एक घंटे या इससे अधिक समय तक दातुन करते हैं जब तक कि पूरी टहनी टूट न जाए।

फेंसी टूथपेस्ट की जगह खरीदें हर्बल दंत मंजन

अच्छी बात ये भी है कि आधुनिक युग में भी आपको बाजार में तमाम टूथपेस्ट ऐसे मिल जाएंगे जो पारंपरिक दातुन की तरह फायदेमंद हैं। बाजार में यदि आप टूथपेस्ट खरीदने जाते हैं तो बेहतर होगा यदि आप हर्बल टूथपेस्ट का चुनाव करें। इस तरह के टूथपेस्ट हर्बल पौधों से बने होते हैं और रासायनिक-मुक्त होते हैं। लिहाजा हर्बल टूथपेस्ट केमिकलयुक्त फेंसी टूथपेस्ट से कहीं बेहतर है। दिलचस्प ये है कि इसके लिए आपको पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है क्योंकि ये पेड़ आपको अपने मुहल्ले में भी मिल जाएंगे या किसी पार्क में।

टूथ ब्रश करने का सही तरीका

विज्ञान के अनुसार, आपको अपने दांतों को कम से कम दो मिनट तक अच्छी तरह से ब्रश करना चाहिए। ब्रश करते समय आपको मुंह के हर कोने को कवर करना चाहिए। आजकल ब्रश में मुलायम स्ट्रोक भी आते हैं जो मसूड़ों और दांतों के अंतराल के बीच छिपी गंदगी को साफ करने में मदद करते हैं। इस तरह के ब्रश भी टहनियों की तरह दांतों की सफाई करते हैं। ब्रश को दांतों पर रगड़ने से पहले इसे अच्छे से साफ करें और इसे समय-समय पर बदलते रहें।

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टूथपेस्ट के बाद जरूरी है स्क्रैपिंग

आयुर्वेद दांतों को ब्रश करने के तुरंत बाद जीभ की सफाई यानी स्क्रेप करने की सलाह देता है। क्योंकि हमारे दांतों से अधिक जीभ पर कीटाणु लगे होते हैं। लिहाजा दांतों के अलावा जीभ की सफाई भी जरूरी है तभी आपका मुंह पूरी तरह से साफ माना जाएगा।


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