Budget 2021 : Transporters long-pending demand for removal of TDS is expected to be fulfilled from the budget, also asked for special status – ट्रांसपोर्टरों को TDS हटाने की लंबे वक्त से लटकी मांग बजट में पूरी होने की आस, विशिष्ट दर्जा भी मांगा

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ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की मांग
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के अध्यक्ष कुलतारण सिंह अटवाल ने कहा कि सड़क परिवहन क्षेत्र से टीडीएस का खत्म किया जाना चाहिए, क्योंकि जीएसटी (GST) आने के बाद यह शुल्क बेमानी और अव्यवहारिक है.छोटे ऑपरेटरों से टीडीएस के नाम पर बेहिसाब कटौती होती हैं, जो न तो सरकारी खजाने से जमा होती हैं और न ही रिफंड का दावा किया जाता है. जिनकी कटौती की जाती है, उन्हें रिटर्न का दावा करने में 3 साल लगते हैं. 

नकद निकासी पर टीडीएस छूट मिले

ए.पी.एम.सी. (मंडी व्यवस्था)और रोड ट्रांसपोर्ट सेक्टर का संचालन नकदी पर आधारित है. कृषि उपज विपणन कंपनियों (APMC) की तरह, सड़क परिवहन क्षेत्र को भी 1 करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक नकद निकासी पर 2% टीडीएस ( TDS) से छूट दी जानी चाहिए.

अनुमानित आयकर तर्कहीन

आयकर कानून (Income Tax) की धारा 44AE के तहत अनुमानित आयकर अव्यावहारिक, त्रुटिपूर्ण और तर्कहीन है, जो कि सकल वाहन भार पर आधारित है जबकि इसको वाहन के लदान क्षमता पर होना चाहिए. वाहनों के लिए इसे 100% से 633% तक बढ़ाया गया है. जो जमीनी हकीकत नहीं है.

पेट्रोल-डीजल जीएसटी के दायरे में हो

पेट्रोल और डीजल जीएसटी (Petrol-Diesel GST) के तहत होना चाहिए जिससे देश भर में एक समान मूल्य निर्धारण हो सके. पेट्रोल और डीजल पर राहत देने के लिए सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क कटौती करनी चाहिए. डीजल 70 रुपये तक पहुंच गया है.

 थर्ड पार्टी प्रीमियम पर टैक्स शून्य हो

गुड्स कैरीइंग व्हीकल्स और पैसेंजर कमर्शियल व्हीकल्स पर थर्ड पार्टी प्रीमियम (Third Party Premium) पर जीएसटी को शून्य करना चाहिए, जिस पर AIMTC से बातचीत के दौरान सहमति बनी थी.

ट्रक ड्राइवर-हेल्पर को बीमा सुरक्षा मिले

ड्राइवरों और क्लीनरों को भी प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के दायरे में लाकर सामाजिक सुरक्षा दी जाए. इन ड्राइवर-हेल्पर को ईएसआई की सुविधा भी मिले.

ऑल इंडिया नेशनल परमिट स्कीम लागू हो

टूरिस्ट वहिकल के लिए नेशनल परमिट स्कीम (National Permit Scheme) भी लाई जानी चाहिए ताकि देश भर में उनकी बेरोकटोक आवाजाही संभव हो और पर्यटन को भी बढ़ावा मिले.

वाहनों के उपकरणों पर टैक्स कम हो

ट्रांसपोर्टरों की मांग है कि बस और ट्रक भी आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति के कारण इस श्रेणी में आते हैं, लिहाजा वाहनों के कलपुर्जों पर टैक्स 28 फीसदी से कम किया जाए. वाहनों के थर्ड पार्टी बीमा प्रीमियम पर भी टैक्स हटाया जाए.

वाहन स्क्रैप पॉलिसी चर्चा के बाद लाई जाए

ट्रांसपोर्टर यूनियन का कहना है कि नई वाहन स्क्रैप पॉलिसी (Vehicle Scrap Policy) को लेकर वे अंधेरे में हैं. 10 या 15 साल पुराने वाहनों को कबाड़ घोषित कर नए वाहन की खरीद पर इंसेंटिव की बजाय सरकार सरकार रिट्रोफिट स्कीम लेकर आए. यानी पुरानी गाड़ी को बदलने की बजाय इंजन, फ्यूल पाइप को बदलने का विकल्प रहे. इससे ट्रांसपोर्टरों पर बोझ कम पड़ेगा.

कृषि के बाद रोजगार का बड़ा क्षेत्र

सड़क परिवहन, भंडारण और आपूर्ति श्रृंखला में देश के कुल कार्यबल का करीब 5.5 फीसदी हिस्सा है. जीडीपी में इस सेक्टर की हिस्सेदारी 4.6 फीसदी तक पहुंच गई है. मैन्युफैक्चरिंग, आपूर्ति और लॉजिस्टिक में भी सड़क परिवहन की अहम हिस्सेदारी है. हम यह भी उम्मीद करते हैं कि सरकार सड़क परिवहन क्षेत्र को राहत देने के लिए आवश्यक कार्य करेगी जो कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार उत्पादन करता है. देश में भर में करीब 60 लाख ट्रकों-बसों का परिचालन होता है.

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