Study on risk of being exposed to COVID-19 says 6 feet distance make no difference | Corona को रोकने में Social Distancing नहीं कारगर! Researchers का दावा, ‘6 Feet की दूरी पर भी Infection का खतरा’

वॉशिंगटन: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस बात पर जोर देता आया है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) से बचाव के लिए 6 फीट (6-Feet Distance) की दूरी है जरूरी. यानी दो लोगों के बीच यदि 6 फीट की दूरी होगी, तो उन्हें संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत कम रहेगा. WHO की इस गाइडलाइन पर पूरी दुनिया अमल कर रही है, लेकिन एक अध्ययन ने इस गाइडलाइन पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के शोधकर्ताओं का कहना दूरी मायने नहीं रखती, फिर चाहे वह 6 फीट हो या 60 फीट. खासतौर पर तब जब व्यक्ति घर जैसी इनडोर जगहों पर हों.  

कोई भी नहीं है Safe

‘द डेली मेल’ की रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं ने अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा पिछले साल जारी COVID-19 दिशानिर्देशों पर सवाल खड़े किए हैं, जिनमें कहा गया था कि कोरोना महामारी से बचने के लिए इनडोर (Indoor) और आउटडोर (Outdoor) दोनों जगहों पर लोगों के बीच छह फीट की दूरी होनी चाहिए. यूएस नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस की प्रोसीडिंग में पिछले हफ्ते प्रकाशित इस अध्ययन में कहा गया है कि मिश्रित स्थानों पर हवा में फैलने वाले वायरस से कोई भी सुरक्षित नहीं है. भले ही वो 6 फीट की दूरी पर हो या 60 फीट की और भले ही उसने मास्क क्यों न पहन रखा हो. 

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इन Factors का किया विश्लेषण

शोधकर्ताओं ने  इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए ट्रांसमिशन को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों का विश्लेषण किया है. जैसे कि एयर फिल्टरेशन, इम्यूनाइजेशन, अलग-अलग स्ट्रेन और इनडोर जगहों पर बिताया गया समय. इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने श्वसन गतिविधि जैसे कि सांस लेने, खाना खाने, बोलने या गाना गाने आदि पर भी ध्यान दिया. MIT के प्रोफेसर मार्टिन बैजेंट (Martin Bazant) ने सीएनबीसी से बातचीत में कहा कि 6 फीट दूरी का कोई खास फायदा नहीं है, खासकर तब जब आप किसी इनडोर जगह पर हों. उन्होंने आगे कहा, ‘जब व्यक्ति मास्क पहनता है, तो वह तेजी से सांस लेता और छोड़ता है. ऐसे में उसके द्वारा छोड़ी गई सांस कमरे में आसपास फैल जाती है, जो दूर खड़े व्यक्ति को भी अपनी जद में ले सकती है’. 

WHO ने इस तथ्य पर नहीं दिया ध्यान

मार्टिन बैजेंट ने कहा कि CDC और WHO ने गाइडलाइन जारी करते समय इनडोर स्थानों पर बिताने जाने वाले समय की अवधि पर ध्यान नहीं दिया, जो कि बेहद जरूरी है. अध्ययन में यह भी कहा गया है कि महामारी के चलते जिन प्रतिष्ठानों को बंद किया गया, उनमें से अधिकांश को लेकर ऐसा कदम उठाने की कोई आवश्यकता नहीं थी. बैजेंट ने कहा कि कई बार जगह बड़ी होती हैं, वहां वेंटिलेशन काफी अच्छा होता है, लोगों द्वारा एक साथ बिताया जाने वाला समय भी ज्यादा नहीं होता, ऐसे में इस तरह के स्थान यदि पूरी क्षमता के साथ भी खुले रहें, तो कोई खतरा नहीं है. 

Mask फिर भी है जरूरी

रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, यदि बंद जगह पर कोई संक्रमित व्यक्ति मास्क पहनकर गाना गा रहा है, तो छह फीट की दूरी पर बैठा दूसरा व्यक्ति सुरक्षित नहीं है. संक्रमित व्यक्ति के मुंह या नाक से निकले ड्रॉपलेट उसे संक्रमित कर सकते हैं. इसलिए दूरी नहीं बल्कि इनडोर स्थानों पर बिताया जाने वाला समय महत्वपूर्ण है. हालांकि. शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि इसके बावजूद मास्क जरूरी है और उसे हर हाल में पहना जाना चाहिए. 

यहां भी कारगर नहीं है Distance

आउटडोर स्थानों के सवाल पर मार्टिन बैजेंट ने कहा कि दूरी का सिद्धांत वहां भी ज्यादा कारगर नहीं है. उन्होंने कहा, ‘संक्रमित हवा किसी को भी प्रभावित कर सकती है, फिर भले ही लोगों के बीच कितनी भी दूरी क्यों न हो’. बैजेंट ने आगे कहा कि शोध के निष्कर्ष यह बताने में मदद कर सकते हैं कि पूरी तरह खुले होने के बावजूद टेक्सास और फ्लोरिडा जैसे राज्यों में ट्रांसमिशन ज्यादा क्यों नहीं रहा. सीडीसी के आंकड़ों के अनुसार, टेक्सास और फ्लोरिडा, जो पूरी तरह से फिर से खुल गए हैं, वहां मिशिगन, पेंसिल्वेनिया और न्यूयॉर्क की तुलना में कोरोना के कम मामले सामने आ रहे हैं. इन राज्यों में COVID-19 प्रतिबंध लागू हैं और यहां मास्क भी अनिवार्य किया गया है.

 




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