भारत में बैठे-बैठे विदेशी कंपनी का लगा दिया चूना, MP में अजब-गजब घोटाला

IL&FS CBI Action
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IL&FS कंपनी ने इंपोर्ट-एक्सपोर्ट बैंक को थमाया 239 करोड़ फर्जी सिक्योरिटी ड्राफ्ट, स्पेन से ज्वाइंट वेंयर के बाद लिया इथियोपिया में रोड कांट्रेक्ट

  • सीबीआई ने इंडिया एक्जिम बैंक की शिकायत पर दर्ज किया धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मामला
  • ईडी भी आईएलएफएस कंपनी के कारोबार पर मनी लाड्रिंग के तहत कर रही जांच, 600 करोड़ के फ्राड के मामले में सीबीआई ने पहले भी दर्ज की थी एफआईआर

भोपाल, ब्यूरो। भारत में बैठे-बैठे आइएलएफएस (IL&FS) कंपनी ने विदेशी कंपनी को चूना लगा दिया। सात आरोपियों ने मिलकर फर्जी सिक्योरिटी ड्राफ्ट देकर रोड बनाने का ठेका लिया। स्पेन से ज्वाइंट वेंचर करने के बाद बैंक के ट्रांजैक्शन में गड़बड़ी की और घटा दिखाने बाद इंपोर्ट एक्सपोर्ट बैंक को भी नुकसान पहुंचाया। इंडिया एक्जिम बैंक की शिकायत पर सीबीआई ने सात लोगों के खिलाफ 239 करोड रुपए की फर्जी सिक्योरिटी ड्राफ्ट के मामले में फिर दर्ज की है।
सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि 2015 में साउथ अफ्रीका के इथियोपिया में सड़क बनाने का ठेका भारत की कंपनी को मिला था इस कंपनी में दो लोगों ने मिलकर टेंडर लिया स्पेन की कंपनी के साथ भारत की आई एल एफ एस कंपनी ने ज्वाइंट वेंचर करते हुए सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया। पांच चरणों में सड़क का निर्माण किया जाना था। दो चरणों का निर्माण कार्य ज्वाइंट वेंचर कंपनी को दिया गया। हालांकि कुछ महीनों पहले सीबीआई ने करीब 6 हजार करोड़ रुपए के गबन के मामले में आईएलएफएस कंपनी के डायरेक्टर और प्रमोटर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इस कंपनी पर ईडी भी मनी लाड्रिंग एक्ट के तहत जांच कर छापेमारी कर चुकी है। सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि इंडिया एक्जिम बैंक ने भोपाल में शिकायत की थी। इसलिए भोपाल सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है। इसके साथ सीबीआई हेडक्वार्टर को भी सूचना दी गई है।

एडवांस की पेमेंट की शर्तों का किया उल्लंघन

सीबीआई ने आईएल एंड एफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनी स्पेन स्थित एल्सैमेक्स एसए के खिलाफ कथित तौर पर धोखाधड़ी और धन की हेराफेरी करके 239 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधाओं का दुरुपयोग करने के लिए एक नई एफआईआर दर्ज की है। इंडिया एक्जिम बैंक ने फारेन बिजनेस के लिे 2015 में एल्सेमेक्स को 35 मिलियन यूरो की क्रेडिट सीमा मंजूर की थी, जो सिंगापुर स्थित आईटीएनएल इंटरनेशनल पीटीई लिमिटेड की सब्सिडरी कंपनी भी है। एडवांस पेमेंट के लिए भुगतान के लिए काउंटर-गारंटी जारी की गई थी, ऐसे फंडों के दुरुपयोग, धोखाधड़ी के दुरुपयोग की स्थिति में काउंटर-गारंटी से वसूली की जानी थी।

इन आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया मामला

सीबीआई ने एल्सेमेक्स, आईएल एंड एफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क और पूर्व निदेशकों रवि पार्थसारथी, मुकुंद सप्रे, रमेश चंदर बावा, रामचंद करुणाकरण, अरुण कुमार साहा और हरि शंकरन के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के अलावा आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक कदाचार से संबंधित प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज की है।

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