वन्यजीव सम्मेलन के बीच मादा बाघ शावक की संदिग्ध मौत, जंगल में मिला शव; आज होगा पोस्टमार्टम

उमरिया – जिले के विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में आज जहां डेढ़ भर के वन्य जीव विशेषज्ञ एवं अधिकारी जुटे हैं वहीं एक मादा बाघ शावक का शव मिलना प्रबंधन पर सवालिया निशान लगा रहा है l बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में आज डॉक्टर समिता राजौरा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एव मुख्य वन्य जीव अभिरक्षक मध्यप्रदेश, एल कृष्णमूर्ति अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) मध्यप्रदेश, संजय श्रीवास्तव पूर्व अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एव मुख्य वन्य जीव अभिरक्षक तमिलनाडु, डाक्टर पराग निगम वैज्ञानिक (जी) भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून, डाक्टर बिलाल हबीब वैज्ञानिक भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून एव कई सी एफ एव डी एफ ओ मौजूद रहे।

वहीं दूसरी तरफ मादा बाघ शावक का संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलना प्रबंधन पर सवालिया निशान लगा रहा है l बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि आज दिनांक 17/07/2026 को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर रेंज अंतर्गत बीट धमोखर की सीमा से लगभग 500 मीटर दूर ग्राम चांपर के राजस्व क्षेत्र में एक मृत मादा बाघ शावक पाई गई।वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तोमर द्वारा मृत शावक का प्राथमिक परीक्षण किया गया, जिसमें शावक के सिर की हड्डियों में फ्रैक्चर पाया गया।

समयाभाव के कारण मृत शावक के शव को सुरक्षित रख लिया गया है। क्षेत्र संचालक द्वारा मौके का निरीक्षण किया गया l वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी के निरीक्षण के पूर्व घटनास्थल पर निरीक्षण हेतु डॉग स्क्वाड द्वारा सर्चिंग तथा मेटल डिटेक्टर की सहायता से गहन निरीक्षण किया गया। कोई भी अस्वभाविक वस्तु नहीं मिली है. दिनांक 18/07/2026 को मृत शावक का विधिवत शव परीक्षण (पोस्टमार्टम) किया जाएगा। शव परीक्षण उपरांत एन टी सी ए के प्रचलित एस ओ पी के अनुसार मृत शावक का दाह संस्कार एवं अन्य आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

गौरतलब है कि जहां मृत मादा बाघ शावक का शव मिला है उस जगह को ददरा हार के नाम से जाना जाता है और उससे कुछ दूरी पर ही निजी फेंसिंग लगी है, वहीं अगर देखा जाय तो इको सेन्सटिव जोन में कई लॉजों का निर्माण चल रहा है और उनकी अनुमति भी पार्क प्रबंधन से मिल रही है, जबकि नियमानुसार कोर क्षेत्र के एक किलोमीटर परिधि का क्षेत्र ईको सेन्सटिव जोन कहा जाता है और वहां किसी भी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता है लेकिन पार्क प्रबंधन की मेहरबानी से खुले आम निर्माण कार्य चल रहे हैं, ऐसे में वन्य जीवों की सुरक्षा कितनी होगी खुद ही अनुमान लगाया जा सकता है l

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