गुना में सोमवार को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से नाम काटे जाने के आरोपों को लेकर जन संसद के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और वकीलों ने एकजुट होकर रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और तिरंगा लेकर केंद्र सरकार एवं चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।रैली की शुरुआत दोपहर करीब 1:30 बजे स्थानीय शास्त्री पार्क से हुई। यहां बड़ी संख्या में विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता और पदाधिकारी एकत्रित हुए। इसके बाद रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए हनुमान चौराहे पहुंची। पूरे रास्ते प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग को लेकर नारे लगाए।वही रैली का नेतृत्व बमौरी विधायक ऋषि अग्रवाल सहित विभिन्न संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों ने किया। प्रदर्शन में कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, समाजवादी पार्टी, शिवसेना यूबीटी, मुखौटा कला मंच, महिला सांस्कृतिक शक्ति संगठन सहित कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बड़ी संख्या में वकीलों ने भी प्रदर्शन में भाग लेते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।हनुमान चौराहे पर पहुंचने के बाद प्रदर्शन एक सभा में तब्दील हो गया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जिससे आम नागरिकों के मतदान के अधिकार पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।जन संसद की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान देशभर में करीब 13.3 करोड़ पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इनमें गरीब, प्रवासी, महिलाएं, अल्पसंख्यक और युवा मतदाता भी प्रभावित होने का दावा किया गया।जन संसद ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से एसआईआर प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने तथा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को दूर करने की मांग की। साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा देने की मांग भी दोहराई गई।प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है, बल्कि मतदाताओं के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस्तीफा नहीं दिया और चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता बहाल नहीं की गई, तो जन संसद के आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।


