‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर PHE के रिटायर्ड अधिकारी से 22 लाख की ठगी, 13 दिन तक साइबर जाल में फंसाए रखा

मैहर। साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। ताजा मामला अमरपाटन थाना क्षेत्र के ग्राम इटमा कोठार से सामने आया है, जहां ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भय दिखाकर साइबर ठगों ने PHE विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी से 22 लाख रुपये की ठगी कर ली। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने एक महिला सहित तीन आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है पुलिस के अनुसार, ग्राम इटमा कोठार निवासी मानेंद्र सिंह राठौर, जो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, ने अमरपाटन थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायत में उन्होंने बताया कि 5 मई 2026 को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात महिला का फोन आया। महिला ने स्वयं को दिल्ली से बताया और दावा किया कि केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) के पास उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला कारोबार से जुड़ा मामला दर्ज है। आरोपियों ने बातचीत के दौरान उन्हें यह विश्वास दिलाने का प्रयास किया कि इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और अब उनके खिलाफ भी कार्रवाई होने वाली है। इसी डर और मानसिक दबाव का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने उन्हें अपने जाल में फंसा लिया।13 दिनों तक चलता रहा ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खेलपुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पीड़ित को लगातार वॉइस कॉल, वीडियो कॉल और मैसेज के माध्यम से संपर्क में रखा।

5 मई से 18 मई तक करीब 13 दिनों तक उन्हें कथित जांच और गिरफ्तारी का भय दिखाया जाता रहा। इस दौरान ठगों ने पीड़ित से उनकी बैंकिंग जानकारी, कृषि भूमि, निवेश और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) सहित आर्थिक स्थिति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कर लीं। बाद में आरोपियों ने उन्हें यह कहकर दबाव में लिया कि जांच प्रक्रिया पूरी कराने के लिए धनराशि एक विशेष खाते में जमा करानी होगी।

चार एफडी तुड़वाकर खाते में जमा कराए पैसे आरोपियों के दबाव में आकर पीड़ित मानवेंद्र सिंह ने अपनी और अपनी पत्नी के नाम पर मौजूद चार फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वा दीं। इसके बाद पूरी राशि को एक बैंक खाते में स्थानांतरित किया गया। 19 मई को RTGS के माध्यम से कुल 22 लाख रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए खाते में भेज दिए गए इतना ही नहीं, ठगों का लालच यहीं नहीं रुका।

23 मई तक वे लगातार संपर्क में रहे और पीड़ित से अतिरिक्त 8 लाख रुपये की मांग भी करते रहे। इसी दौरान पीड़ित को शक हुआ और उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई। प्रारंभिक जांच के आधार पर एक महिला और दो पुरुष आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2), 308(2), 61(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66D के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल की मदद से आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

अमरपाटन पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा किए गए वीडियो कॉल, ऑडियो कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें। किसी भी जांच एजेंसी, पुलिस या सरकारी विभाग द्वारा फोन पर बैंक खाते, OTP, ATM कार्ड, FD या अन्य वित्तीय जानकारी नहीं मांगी जाती पुलिस ने लोगों को ATM फ्रॉड से भी सावधान रहने की सलाह दी है।मामले के बाद मैहर पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह ने कहना है कि साइबर अपराधी लोगों को बातचीत में उलझाकर उनका ATM कार्ड बदल देते हैं या ऑनलाइन माध्यम से बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते हैं।

पुलिस का कहना है कि सतर्कता ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन ठगी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं यह संस्करण वेबसाइट प्रकाशन के लिए अधिक व्यवस्थित, विस्तृत और पेशेवर शैली में तैयार किया गया है।

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