भोपाल। मध्यप्रदेश में प्रशासनिक जमावट को लेकर बदलाव की कवायद तेज होने के संकेत हैं। जिला स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन, जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय और विभागीय कामकाज की समीक्षा के आधार पर कलेक्टरों की पदस्थापना में बदलाव की रणनीति सामने आई है। इसी क्रम में 2017 बैच के IAS अधिकारियों को उनकी पहली जिला पदस्थापना मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की चर्चा है।
प्रशासनिक बदलावों में अदित्य सिंह और रोहित सिसोनिया की मुख्यधारा में वापसी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के सख्त रुख के चलते कम अवधि से पदस्थ कलेक्टरों को भी हटाने से परहेज नहीं किए जाने की बात कही जा रही है, खासकर वहां जहां योजनाओं के क्रियान्वयन और जनप्रतिनिधियों से समन्वय में कमी सामने आई।
चुनौतियों वाले जिलों में अनुभवी अधिकारियों पर भरोसा
पन्ना में केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़े भू-अर्जन के काम और बालाघाट में स्वास्थ्य विभाग की चुनौतियों से निपटने के लिए अनुभवी कलेक्टरों की तैनाती को अहम माना जा रहा है। वहीं, बेहतर प्रदर्शन और विभागीय पकड़ के आधार पर सुखबीर सिंह को मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रमुख सचिव जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की बात सामने आई है।
उद्योग और स्वास्थ्य विभाग में भी बदलाव
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) की तैयारियों को मजबूती देने के लिए उद्योग विभाग में प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की कवायद की गई है। लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग को स्वतंत्र सचिव देने, उद्योग विभाग में नए सचिव की नियुक्ति और कुमार पुरुषोत्तम को पूर्णकालिक MSME आयुक्त की जिम्मेदारी दिए जाने को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।स्वास्थ्य विभाग में रश्मि शमी को वरिष्ठ अपर मुख्य सचिव (ACS) के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी है। वहीं, भरत यादव को जनसंपर्क सचिव का अतिरिक्त प्रभार मिलने से उनकी प्रशासनिक भूमिका का दायरा बढ़ा है।
मूंग खरीदी आंदोलन के बाद कलेक्टरों पर कार्रवाई की चर्चा
मूंग खरीदी को लेकर हुए आंदोलन के दौरान प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाने के कारण हरदा और होशंगाबाद के कलेक्टरों को कम कार्यकाल के बाद ही बदले जाने की बात भी इस प्रशासनिक फेरबदल से जोड़कर देखी जा रही है।


