Ajit Jogi was also concerned about the migrant laborers on death bed said run trains and buses soon nodakm | आखरी दम तक अजीत जोगी को थी प्रवासी मजदूरों की फिक्र, कहा था जल्द चलाओ ट्रेनें और बसें | raipur – News in Hindi

आखिरी दम तक अजीत जोगी को थी प्रवासी मजदूरों की फिक्र, कहा था जल्द चलाओ ट्रेनें और बसें

हॉस्पिटल में भर्ती होने से पहले अजीत जोगी ने प्रवासी मजदूरों की स्थिति पर लिखा था कि उनकी स्थिति देखकर पीड़ा होती है.

रायपुर. छत्‍तीसगढ़ के पूर्व मुख्‍यमंत्री अजीत जोगी अपने आखिरी समय तक प्रदेश वासियों की चिंता करते रहे. उन्‍होंने अपनी मृत्‍यु शैया पर जाने से पहले कुछ ट्वीट किए थे. ये सभी ट्वीट उनके या उनके परिवार के बारे में नहीं, बल्कि प्रवासी मजदूरों के प्रति संवेदना दिखाने वाले थे. 9 मई के अपने एक ट्वीट में उन्‍होंने लिखा था कि प्रवासी मजदूरों का दुख असहनीय होता जा रहा है. जैसे वंदे भारत चालू किया गया है, वैसे ही भारत के सभी संसाधनों को उपयोग कर अर्थात सभी रेल, सभी निजी और सरकारी ट्रक और बसों को लगाकर एक अभियान चलाया जाए. इस अभियान के जरिये 4 दिन में इन सबको इनके राज्य की सीमा तक पहुंचा दें. उनकी स्थिति देखकर पीड़ा होती है.

प्रदेश के पहले मुख्‍यमंत्री रहे अजीत जोगी को सिर्फ छत्‍तीसगढ़ के ही मजदूरों की चिंता नहीं थी, बल्कि वे दूर प्रदेश के किसी मजदूर के बारे में भी उतने ही फिक्रमंद रहते थे. यही फिक्र 8 मई के उनके एक ट्वीट में दिखता है. 8 मई को किए ट्वीट में उन्‍होंने औरंगाबाद ट्रेन हादसे में 19 मजदूरों की मृत्‍यु पर गहरी चिंता जताई थी. उन्‍होंने अपने ट्वीट में लिखा था कि औरंगाबाद में हुए मालगाड़ी हादसे में 16 मजदूरों की दर्दनाक मौत दिल दहलाने वाली है. समय पर मजदूरों को वापस ना लाने के कारण यह दुखद हादसा सामने आया है. घायलों का उचित इलाज हो, सबको पर्याप्त मुआवजा मिले और सब मजदूर सुरक्षित वापस लौटें, यही कामना है.

मेरे भतीजे जगन का तत्काल पहुंचना अच्छा लगा..
अजीत जोगी विशाखापट्टनम गैस लीक कांड के दौरान भी इसी तरह अपनों को लेकर परेशान हुए थे. 7 मई को उन्‍होंने अपने एक ट्वीट में लिखा था कि विशाखापट्टनम में गैस लीक से 11 व्यक्तियों की मौत ने भोपाल के गैस ली की याद दिला दी. पहले लगा था, वैसा ही कुछ होगा, पर सौभाग्य से यह गैस उतनी लीथल नहीं थी. इस बार, केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर जो राहत काम चालू किए हैं, वह पर्याप्त लगते हैं. मेरे भतीजे जगन का तत्काल पहुंचना अच्छा लगा.

अगले दिन यानी 8 मई को इसी विषय पर उन्‍होंने लिखा था कि स्टेरिंग गैस भी खतरनाक है. जिसके शरीर में गई है, उसे कैंसर होने की संभावना है. इसलिए भोपाल दोहराया ना जाए. फैसले के लिए 35 साल ना लगे. 90% लोगों को केवल 25000 मुआवजा ना मिले और पीढ़ियों को दुख सहना ना पड़े. विदेशी मालिक सजा से ना बचे, इसके लिए नया कानून बनायें.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए रायपुर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.


First published: May 29, 2020, 4:52 PM IST




Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here