हॉस्पिटल में भर्ती होने से पहले अजीत जोगी ने प्रवासी मजदूरों की स्थिति पर लिखा था कि उनकी स्थिति देखकर पीड़ा होती है.
रायपुर. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी अपने आखिरी समय तक प्रदेश वासियों की चिंता करते रहे. उन्होंने अपनी मृत्यु शैया पर जाने से पहले कुछ ट्वीट किए थे. ये सभी ट्वीट उनके या उनके परिवार के बारे में नहीं, बल्कि प्रवासी मजदूरों के प्रति संवेदना दिखाने वाले थे. 9 मई के अपने एक ट्वीट में उन्होंने लिखा था कि प्रवासी मजदूरों का दुख असहनीय होता जा रहा है. जैसे वंदे भारत चालू किया गया है, वैसे ही भारत के सभी संसाधनों को उपयोग कर अर्थात सभी रेल, सभी निजी और सरकारी ट्रक और बसों को लगाकर एक अभियान चलाया जाए. इस अभियान के जरिये 4 दिन में इन सबको इनके राज्य की सीमा तक पहुंचा दें. उनकी स्थिति देखकर पीड़ा होती है.
प्रवासी मजदूरों का दुख असहनीय होता जा रहा है जैसे वंदे भारत चालू किया गया है वैसा ही भारत के सभी संसाधनों को उपयोग कर अर्थात सभी रेल सभी निजी और सरकारी ट्रक और बसों को लगाकर अभियान चलाकर 4 दिन में इन सबको इनके राज्य की सीमा तक पहुंचा दें उनकी स्थिति देखकर पीड़ा होती है
— Ajit Jogi (@ajitjogi_cg) May 9, 2020
प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहे अजीत जोगी को सिर्फ छत्तीसगढ़ के ही मजदूरों की चिंता नहीं थी, बल्कि वे दूर प्रदेश के किसी मजदूर के बारे में भी उतने ही फिक्रमंद रहते थे. यही फिक्र 8 मई के उनके एक ट्वीट में दिखता है. 8 मई को किए ट्वीट में उन्होंने औरंगाबाद ट्रेन हादसे में 19 मजदूरों की मृत्यु पर गहरी चिंता जताई थी. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था कि औरंगाबाद में हुए मालगाड़ी हादसे में 16 मजदूरों की दर्दनाक मौत दिल दहलाने वाली है. समय पर मजदूरों को वापस ना लाने के कारण यह दुखद हादसा सामने आया है. घायलों का उचित इलाज हो, सबको पर्याप्त मुआवजा मिले और सब मजदूर सुरक्षित वापस लौटें, यही कामना है.
औरंगाबाद में हुए मालगाड़ी हादसे में 16 मजदूरों की दर्दनाक मौत दिल दहलाने वाली है समय पर मजदूरों को वापस ना लाने के कारण यह दुखद हादसा सामने आया है घायलों का उचित इलाज हो सबको पर्याप्त मुआवजा मिले और सब मजदूर सुरक्षित वापस लौटें यही कामना है
— Ajit Jogi (@ajitjogi_cg) May 8, 2020
मेरे भतीजे जगन का तत्काल पहुंचना अच्छा लगा..
अजीत जोगी विशाखापट्टनम गैस लीक कांड के दौरान भी इसी तरह अपनों को लेकर परेशान हुए थे. 7 मई को उन्होंने अपने एक ट्वीट में लिखा था कि विशाखापट्टनम में गैस लीक से 11 व्यक्तियों की मौत ने भोपाल के गैस ली की याद दिला दी. पहले लगा था, वैसा ही कुछ होगा, पर सौभाग्य से यह गैस उतनी लीथल नहीं थी. इस बार, केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर जो राहत काम चालू किए हैं, वह पर्याप्त लगते हैं. मेरे भतीजे जगन का तत्काल पहुंचना अच्छा लगा.
विशाखापट्टनम में गैस लीक से 11 व्यक्तियों की मौत ने भोपाल के गैस ली की याद दिला दी पहले लगा था वैसा ही कुछ होगा पर सौभाग्य से यह गैस उतनी लीथल नहीं थी इस बार केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर जो राहत काम चालू किए हैं वह पर्याप्त लगते हैं मेरे भतीजे जगन का तत्काल पहुंचना अच्छा लगा
— Ajit Jogi (@ajitjogi_cg) May 7, 2020
अगले दिन यानी 8 मई को इसी विषय पर उन्होंने लिखा था कि स्टेरिंग गैस भी खतरनाक है. जिसके शरीर में गई है, उसे कैंसर होने की संभावना है. इसलिए भोपाल दोहराया ना जाए. फैसले के लिए 35 साल ना लगे. 90% लोगों को केवल 25000 मुआवजा ना मिले और पीढ़ियों को दुख सहना ना पड़े. विदेशी मालिक सजा से ना बचे, इसके लिए नया कानून बनायें.
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First published: May 29, 2020, 4:52 PM IST


