गुना विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से मचा हड़कंप, ABVP का 72 घंटे का अल्टीमेटम; वित्त नियंत्रक का कक्ष सील।गुना विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 72 घंटे के भीतर जांच और कार्यवाही के संबंध में औपचारिक आदेश जारी करने की मांग की है। निजी वाहन के ईंधन भुगतान से लेकर बस और जनरेटर की व्यवस्था, पुस्तकालय में पुस्तकों की कमी और प्रयोगशालाओं में उपकरणों की अनुपलब्धता तक कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मामला उस समय और महत्वपूर्ण हो गया, जब तहसीलदार मयंक तिवारी ने विश्वविद्यालय के वित्त नियंत्रक के कक्ष को सील कर अपने कब्जे में ले लिया। गुना के क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं और शैक्षणिक सुविधाओं की कमी को लेकर ABVP ने प्रशासन के समक्ष ज्ञापन सौंपा है। विद्यार्थी परिषद ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड खंगालने और अनियमितताएं प्रमाणित होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही करने की मांग की है।विद्यार्थी परिषद ने आरोप लगाया कि 27 अगस्त 2026 को वित्त नियंत्रक की ओर से निजी वाहन क्रमांक 24BH9523E के लिए एक ही दिन में 20 लीटर और 30 लीटर ईंधन की प्रतिपूर्ति के देयक प्रस्तुत किए गए। परिषद ने इन बिलों को लेकर सवाल उठाते हुए मांग की है कि भुगतान की प्रक्रिया, बिलों की वैधता और वित्तीय नियमों के पालन की जांच की जाए। दूसरा बड़ा सवाल विश्वविद्यालय की मूलभूत व्यवस्थाओं को लेकर है। ABVP का कहना है कि कार्यपरिषद से अनुमोदित परिवहन बस की खरीद और बिजली आपूर्ति के लिए जनरेटर की व्यवस्था का क्रियान्वयन समय पर नहीं हो पाया। परिषद ने मांग की है कि इन निर्णयों की समीक्षा की जाए और विद्यार्थियों की जरूरतों को देखते हुए आवश्यक सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराई जाएं।विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में संदर्भ पुस्तकों की कमी और प्रयोगशालाओं में जरूरी वैज्ञानिक उपकरण उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा उठाया है। परिषद का सवाल है कि जब विद्यार्थियों से प्रायोगिक शुल्क लिया जाता है, तो उन्हें प्रयोग करने के लिए आवश्यक उपकरण और सुविधाएं क्यों नहीं मिल रही हैं? विश्वविद्यालय में बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में इन शिकायतों की जांच और समस्याओं का समाधान विद्यार्थियों के हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।ABVP ने वित्त नियंत्रक को उनके वर्तमान पद से हटाकर मूल संस्था, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गुना में वापस भेजने की मांग भी की है। इसके साथ ही परिषद ने कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने तथा पुस्तकालय, प्रयोगशाला उपकरणों की खरीद और अधोसंरचना पर हुए खर्च की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग रखी है। परिषद चाहती है कि जांच रिपोर्ट निर्धारित समय-सीमा में सार्वजनिक की जाए, ताकि पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे।तहसीलदार मयंक तिवारी द्वारा वित्त नियंत्रक का कक्ष सील कर अपने कब्जे में लेने की कार्यवाही ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब इस कार्यवाही के पीछे की आधिकारिक वजह, संबंधित अभिलेखों की स्थिति और आगे की जांच को लेकर प्रशासनिक स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण होगा।ABVP के जिला संयोजक अंकित शर्मा ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। परिषद ने 72 घंटे के भीतर जांच एवं कार्यवाही के संबंध में औपचारिक आदेश जारी करने का अल्टीमेटम दिया है। परिषद ने चेतावनी दी है कि मांगों पर उचित कार्यवाही नहीं होने पर विधिक सीमाओं के अंतर्गत अनिश्चितकालीन घेराव, सांकेतिक तालाबंदी और जन-जागरण आंदोलन शुरू किया जाएगा। साथ ही, मामले को मध्य प्रदेश लोकायुक्त और उच्च शिक्षा विभाग के समक्ष उठाने की बात भी कही गई है।


