नई दिल्ली: ह्यूस्टन (Houston) में स्थित चीनी काउंसलेट को बंद कराने के लिए अमेरिका (America) के संघीय एजेंट्स बिल्डिंग में जा घुसे. अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि ह्यूस्टन काउंसलेट चीन द्वारा चलाए जा रहे जासूसी नेटवर्क का अड्डा बना हुआ था और पूरे देश में राजनयिक सुविधाओं का इस्तेमाल करते हुए जासूसों की गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एक बड़ी साजिश का हिस्सा था.
अमेरिका इसको बंद करने का आदेश पहले ही दे चुका है, ऐसे में दी गई म्याद पूरी होते ही, इसको अंजाम तक पहुंचाने के लिए, अमेरिकी अधिकारी शुक्रवार को चीनी (Chinese Counsel) काउंसलेट के दरवाजे बलपूर्वक खुलवाते देखे गए. अधिकारियों के इस जत्थे में क्लिफ सीग्रोव्स भी दिखाई दिए, जो विदेश विभाग के विदेशी मिशनों के सर्वोच्च अधिकारी माने जाते हैं.
जब ये लोग पीछे का दरवाजा खोलकर अंदर चले गए, तो वर्दी में यूएस स्टेट डिपार्टमेंट ब्यूरो ऑफ डिप्लोमेटिक सिक्योरिटी के 2 जवान आए और गेट पर सुरक्षा के लिए खड़े हो गए. इधर चेंगदू (Chengdu) में अमेरिका काउंसलेट (वाणिज्य दूतावास) से आधिकारिक प्रतीक चिन्ह शनिवार को हटा दिए गए. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कई काली एसयूवी गाड़ियां, कई ट्रक, 2 सफेद वैन और एक ताला मैकेनिक की वैन शुक्रवार को उस परिसर में दाखिल हुईं.
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अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ये काउंसलेट टेक्सास रिसर्च इंस्टीट्यूट में एक घोटाले की जांच में फंसा था, और चीनी काउंसलेट के अधिकारी, ‘सीधे रिसर्चर्स के साथ बातचीत मे शामिल थे और उन्हें बता रहे थे कि किस तरह की सूचनाओं को इकट्ठा करना है’. बता दें कि अमेरिका ने मंगलवार को चीन को बमुश्किल 72 घंटे दिए थे कि वो ह्यूस्टन के काउंसलेट में ‘अपने सारे ऑपरेशन और ईवेंट बंद कर दे’. चीनी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने अमेरिका के इस आदेश को दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी करने वाला बताया.
चीन और अमेरिका के रिश्ते ट्रेड डील वॉर, कोरोना वायरस महामारी, चीन में झिंगझियांग और हांगकांग में मानवाधिकार उल्लंघन पर अमेरिका की चीनी आलोचना के चलते पिछले एक साल में तेजी से गिरे हैं. वाशिंगटन की ह्यूस्टन काउंसलेट बंद करने की मांग की वजह से चीन ने भी शुक्रवार को मांग की है कि अमेरिका को भी चेंगदू में अपना काउंसलेट बंद करना होगा.
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