बाकू: अर्मेनिया और अजरबैजान (Armenia -Azerbaijan) के बीच पिछले चार दिनों से जारी जंग (War) के लंबा खींचने की आशंका है. दोनों ही देशों ने युद्ध रोकने करने और शांति के साथ समस्या का हल निकालने की अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपील हो खारिज कर दिया है.
अर्मेनियाई और अजरबैजान की सेनाएं विवादित नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र (Nagorno-Karabakh) को लेकर आमने-सामने हैं. दोनों तरफ से बड़ी मात्रा में गोलीबारी हो रही है. दोनों ही देश एक-दूसरे को बड़ा नुकसान पहुंचाने का दावा कर रहे हैं. इस लड़ाई में अब तक 100 के आसपास लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों घायल हैं.
‘वार्ता का सवाल ही नहीं’
अमेरिका सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा लगातार दोनों देशों से युद्ध समाप्त करने की अपील की जा रही है. अर्मेनियाई और अजरबैजान की जंग को लेकर जिस तरह का रुख तुर्की ने दिखाया है उससे बाद यह आशंका बढ़ गई है कि रूस भी इस लड़ाई में अर्मेनियाई की तरफ से उतर आये. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय जल्द से जल्द इस विवाद के शांतिपूर्ण निपटारे पर जोर दे रहा है. हालांकि, अर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोलस पशिनियन (Armenian Prime Minister Nikol Pashinyan) ने साफ कर दिया है कि अजरबैजान के साथ वार्ता के लिए तैयार नहीं हैं.
‘तुर्की पर उकसावे का आरोप’
अर्मेनिया ने आरोप लगाया है कि तुर्की उकसावे वाली कार्रवाई कर रहा है और उसके फाइटर जेट ने अर्मेनिया की हवाई सीमा का उल्लंघन किया है. वहीं, अजरबैजान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसके सैनिकों ने अर्मेनिया के 130 टैंक, 200 तोपखाने, 25 विमान-रोधी यूनिट, पांच गोला-बारूद डिपो, 50 एंटी-टैंक यूनिट, 55 सैन्य वाहनों को नष्ट कर दिया है. अजरबैजान का यह भी कहना है कि अर्मेनिया के तरफ से लगातार उसके नागरिक इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है.
तब मारे गए थे 200 लोग
आपको बता दें कि पूर्व सोवियत संघ का हिस्सा रह चुके अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच युद्ध की बड़ी वजह है नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र (Nagorno-Karabakh). इस क्षेत्र के पहाड़ी इलाके को अजरबैजान अपना बताता है, जबकि यहां अर्मेनिया का कब्जा है. 1994 में खत्म हुई लड़ाई के बाद से इस इलाके पर अर्मेनिया का कब्जा है. 2016 में भी दोनों देशों के बीच इसी इलाके को लेकर खूनी युद्ध हुआ था, जिसमें 200 लोग मारे गए थे. अब एक बार फिर से दोनों देश आमने-सामने हैं.
चिंता की सबसे बड़ी वजह
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता यह है कि यदि दो देशों की इस लड़ाई में रूस जैसी महाशक्तियां शामिल हो जाती हैं, तो यह विश्व युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो जायेगी. कोरोना संकट के बीच दुनिया और किसी संकट को झेलने की स्थिति में नहीं है. इसलिए सुलह की कोशिशें की जा रही हैं. अमेरिका सहित कई देशों ने अर्मेनिया और अजरबैजान से युद्ध बंद करने के अपील की है. पिछले चार दिनों से जारी इस जंग में अब रूस, तुर्की, फ्रांस, ईरान और इजराइल के भी शामिल होने का खतरा बढ़ गया है.
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