नई दिल्ली: आतंकवाद (Terrorism)के मुद्दे पर भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र (UN) में पाकिस्तान (Pakistan) पर निशाना साधा है. भारत ने कहा कि आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और उसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक स्वर में बोलना होगा.
सख्त कार्रवाई की जरूरत
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव येदला उमाशंकर (Yedla Umasankar) ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आतंकवाद से लड़ाई का मतलब केवल आतंकियों और उनके संगठन/नेटवर्क को खत्म करना ही नहीं है, बल्कि उन्हें आर्थिक मदद पहुंचाने, शरण देने और बढ़ावा देने वालों की पहचान करके उनके खिलाफ सख्त कदम उठाना भी है.
सिलेक्टिव नहीं हो सकते
‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को खत्म करने के उपाय’ विषय पर भारत का पक्ष रखते हुए उमाशंकर ने कहा कि आतंकवाद से लड़ाई में हम सिलेक्टिव नहीं हो सकते. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवादी संगठनों से निपटने या उनके बुनियादी ढांचे को नष्ट करने में सिलेक्टिव नहीं होना चाहिए. उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना आगे कहा कि कुछ देश आतंकवादियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वित्तीय सहायता पहुंचा रहे हैं, इस पर तुरंत लगाम लगाने की जरूरत है.
FATF में पाक का फैसला जल्द
भारत का बयान वित्तीय कार्रवाई कार्यदल (Financial Action Task Force-FATF) की महत्वपूर्ण बैठक से कुछ दिन पहले आया है, जिसमें यह फैसला होना है कि पाकिस्तान को काली सूची में डाला जाये या नहीं. पाकिस्तान 2018 से FATF की ग्रे-लिस्ट में है, जो निवेशकों को पाकिस्तान आने से रोकती है. क्योंकि उस धन का इस्तेमाल आतंकवाद के वित्तपोषण में किया जा सकता है.
भारत प्रायोजित आतंकवाद का शिकार
येदला उमाशंकर ने सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का पक्ष रखा. उन्होंने कहा, ‘भारत अपनी सीमाओं पर प्रायोजित आतंकवाद का शिकार होता रहा है और कोई भी कारण या शिकायत, आतंकवाद को उचित नहीं ठहरा सकती है, जिसमें राज्य द्वारा प्रायोजित सीमा-पार आतंकवाद शामिल है’.
आतंकवाद से मुकाबले के लिए भारत की प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ‘हम सूचना के आदान-प्रदान, प्रभावी सीमा नियंत्रण के लिए क्षमता निर्माण, आधुनिक तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने और अवैध वित्तीय प्रवाह की निगरानी एवं उस पर अंकुश लगाकर आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए हमेशा तैयार हैं.’
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