bihar assembly elections 2020 bihar liquor ban sharab bandi nitish kumar JDU liquor smuggling in bihar – बिहार में शराबबंदी : 4 सालों में 2 लाख गिरफ्तारियां और उत्पीड़न के मामले, लेकिन क्या है योजना की हकीकत?

बिहार में शराबबंदी : 4 सालों में 2 लाख गिरफ्तारियां और उत्पीड़न के मामले, लेकिन क्या है योजना की हकीकत?

बिहार में नीतीश सरकार के शराबबंदी के फैसले ने एक अलग ही दानव खड़ा कर दिया है. (फाइल फोटो)

पटना:

Bihar Assembly Elections 2020 : बिहार में शराबबंदी (Bihar Liquor Ban) के चलते करीब दो लाख लोग गिरफ्तार हो चुके हैं लेकिन उसके बावजूद शराबबंदी सफल नहीं हो पाई. शराब के नाम पर लोगों के उत्पीड़न करने की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं. बीते चार साल में दो लाख लोगों को शराब के मामले में जेल में डालने के बावजूद सजा केवल 400 लोगों को ही हो पाई है.

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बिहार के पूर्णियां की 57 साल की रानी देवी के जवान बेटे दीपक कुमार की मौत हो चुकी है उन्होंने शुक्रवार को बेटे की मौत के 13 दिनों बाद अपना ढाबा खोला है. दीपक उनका यह ढाबा संभालता था. 24 अक्टूबर को शराब बेचने के आरोप में आबकारी विभाग ने पकड़ा, दूसरे दिन लॉकअप में उसकी लाश मिली. अब परिवार इसे हत्या और प्रशासन आत्महत्या बता रही है. रानी देवी के आंसू नहीं थम रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘पापा का हाथ बंटाता था ढाबा चलाने में, फिर पढ़ता भी था. हमें इंसाफ चाहिए. मेरा जवान बेटा कैसे मरा?’ दीपक के पिता निर्भय सिंह कहते हैं कि ‘चक्कर काट रहा हूं. मेरे बेटे की मौत की जांच भी नहीं कर रहे हैं. चुनाव के बाद बोल रहे हैं आना.’

पूर्णिया से करीब 500 किमी दूर सीवान के राहुल का भी एक मामला है. बीते चार साल से दुबई में इलेक्ट्रीशियन का काम करने वाले राहुल अब गाय को चारा दे रहे हैं. लॉकडाउन के दौरान एक दिन रात को आबकारी विभाग ने घर छापा मारा. सात दिन जेल में रहने के चलते विदेश की नौकरी भी छूट गई और परिवार आर्थिक दुश्वारियों से घिर गया. परिवार का आरोप है कि निजी दुश्मनी के चलते फंसाया गया है. राहुल यादव ने कहा कि ‘विदेश से आए 10 दिन हुआ था. शाम को बाजार से लौटा तो पुलिस ने पूछा कि रिंकू कहां है. मैं आया था मुझे लेकर गए और जेल में डाल दिया.’

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शराबबंदी के बावजूद उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड और नेपाल से धड़ल्ले से तस्करी होकर बिहार के दूरदराज इलाकों में शराब पहुंच रही है. पश्चिम बंगाल सीमा पर बायसी थाने में दर्जनों शराब और कफ सीरप से भरे ट्रक खड़े हैं लेकिन थाने से लेकर दूसरे राज्यों में दिन-रात इस तरह की चेकिंग के बावजूद तस्करी नहीं रुक रही है और शराब एक फोन पर सप्लाई हो जाती है.

शराब बंदी से पहले बिहार में 6,000 दुकानें थी और हर साल करीब 1500 करोड़ की आमदनी सरकार को होती थी लेकिन बीते चार साल में शराब बंदी के बाद जहां बिहार को 6 हजार करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा वहीं अपराधियों के लिए मोटे मुनाफे का कारण भी बन गया है. पूर्णिया के पत्रकार पंकज भारतीय कहते हैं, ‘आज की तारीख में शराब अपराधियों के लिए चोखा धंधा है पांच सौ लगाओं और हजार पाओ.’

शराब बंदी सियासी फैसला है या समाज को सुधारने वाला, इस पर अलग-अलग तबके की अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन सरकार के लिए शराब की तस्करी और उत्पीड़न रोकना जरूर चुनौती बनी हुई है.

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