Bihar Exit Polls : close fight between BJP-JDU and RJD grand alliance in Bihar – Bihar poll of exit polls : बिहार में BJP-JDU और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर के आसार

Bihar poll of exit polls : बिहार में BJP-JDU और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर के आसार

Bihar poll of exit polls : कोरोना काल के बीच पहला विधानसभा चुनाव बिहार में हुआ. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

Poll of Exit Polls 2020: बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections 2020) के तीसरे चरण का मतदान खत्म होने के बाद एग्जिट पोल (Exit Polls) आ चुका है. एग्जिट पोल के अनुसार, बिहार (Bihar) में भाजपा-जदयू और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर दिखाई दे रही है. अलग-अलग न्यूज चैनलों की तरफ से जारी किए गए एग्जिट पोल्स (Exit Polls) को मिलाकर NDTV ने ‘पोल ऑफ एग्जिट पोल्स’ (Poll of Exit Polls) जारी किया. तीन एग्जिट पोल का पोल ऑफ पोल्स करने से पता चल रहा है कि भाजपा-जदयू गठबंधन को 112, महागठबंधन को 119 और अन्य को 08 से 12 सीटें मिल सकती हैं.

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एबीपी न्यूज और सी-वोटर्स के सर्वे में किसी को बहुमत मिलते नहीं दिख रहा और त्रिशंकु विधानसभा के आसार हैं. बीजेपी-जदयू गठबंधन को 104-128 सीटें मिल सकती हैं. जबकि राजद-कांग्रेस के महागठबंधन को 108-131 सीटें मिलने के आसार हैं. अन्य पार्टियों को 5से 11 सीटें मिल सकती हैं. टाइम्स नाउ-सी वोटर के सर्वे के अनुसार भाजपा-जदयू गठबंधन को 116 सीटें मिलने और महागठबंधन को 120 सीटें मिलने के आसार दिख रहे हैं. अन्य को सात सीटें मिल सकती हैं. एबीपी-सी वोटर के सर्वे के अनुसार, राजद बिहार में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभर सकती है. उसे 81-89 सीटें मिल सकती हैं. जबकि बीजेपी को 66-74 सीटें और 38 से 45 सीटें मिलने के आसार हैं. रिपब्लिक और जन की बात के पोल में महागठबंधन को बहुमत मिलता दिख रहा है. इसमें बीजेपी के गठबंधन को 91 से 117 सीटें और महागठबंधन को 118-138 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं. अन्य को 7-14 सीटें मिल सकती हैं.

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तीसरे चरण में करीब 55 फीसदी मतदान

बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव के अंतिम चरण में 15 जिलों के 78 सीटों पर शनिवार को मतदान हुआ. इस चरण में करीब 2.34 करोड़ मतदाता थे, जिनमें से करीब 55 फीसदी ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. मतदान खत्म होते ही 1204 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला ईवीएम (EVM)  में कैद हो गया. तीसरे चरण में बिहार विधानसभा अध्यक्ष और राज्य के 12 मंत्री भी चुनाव मैदान में थे. 

पहले दो चरणों में भी 50 फीसदी से ज्यादा मतदान

दूसरे चरण में 17 जिलों की 94 विधानसभा सीटों पर 53.51 फीसदी वोटिंग हुई थी. इस चरण में राजद नेता और महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav), उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव के अलावा एनडीए (NDA)सरकार के चार मंत्री भी उम्मीदवार थे. इससे पहले 28 अक्टूबर को हुए प्रथम चरण के मतदान में राज्य की 71 विधानसभा सीटों पर 55.69 फीसदी लोगों ने मतदान किया. 10 नवंबर को मतगणना होगी.

बेरोजगारी और विकास के मुद्दे पर लड़ा गया चुनाव

बिहार में इस बार सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) और राजद (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन के बीच मुकाबला था. एनडीए में इस बार जीतन राम मांझी की पार्टी हम  और मुकेश साहनी की वीआईपी पार्टी भी थी. जबकि महागठबंधन में कांग्रेस (Congress) के अलावा वामपंथी दल शामिल थे. महागठबंधन ने जहां बिहार में बेरोजगारी, सरकारी भर्ती पर रोक, आंगनवाड़ी और अन्य कार्यकर्ताओं के कम मानदेय, प्रवासी मजदूरों की स्थिति जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया.

प्रधानमंत्री ने नीतीश के लिए खुलकर समर्थन मांगा

एनडीए ने 15 साल में किए गए विकास कार्यों, शिक्षा-स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाओं, बिजली-पानी, सड़क की बेहतर स्थिति बताकर जनता से वोट मांगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime minister Narendra Modi) ने स्वयं 12 रैलियां कर जंगलराज को लेकर मतदाताओं को आगाह किया औऱ डबल इंजन की सरकार को फिर चुनने की अपील की.  उन्होंने सोशल मीडिया पर चार पेज का पत्र जारी कर कहा था कि बिहार के विकास के लिए उन्हें नीतीश कुमार की जरूरत है.

दस लाख नौकरी बनाम मुफ्त वैक्सीन 

चुनाव प्रचार के दौरान राजद का दस लाख सरकारी नौकरी (Government job) देने का वादा छाया रहा. युवाओं से जुड़े ऐसे मुद्दों को लेकर तेजस्वी की रैली में भारी भीड़ भी देखी गई. वहीं बीजेपी अपने संकल्प पत्र में 19 लाख रोजगार देने और कोरोना की मुफ्त वैक्सीन (Free Vaccine) देने का वादा कर सुर्खियों में आ गई. ये दोनों मुद्दे खूब उछले.

युवा तेजस्वी और चिराग के निशाने पर रहे नीतीश कुमार

बिहार में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव (Tejashi yadav) और लोजपा नेता चिराग पासवान (Chirag Paswan) के सीधे निशाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रहे. लोजपा ने चुनाव के ठीक पहले एनडीए से अलग होकर नीतीश के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि बीजेपी के प्रति नरम रुख अपनाया. वहीं तेजस्वी ने भी इसे युवा बनाम बुजुर्ग की लड़ाई बनाने की पुरजोर कोशिश की. तीसरे चरण की आखिरी रैली में नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के अंतिम चुनाव वाला बयान देकर भावनात्मक कार्ड खेला, लेकिन तेजस्वी और चिराग ने इसे भी हथियार बनाया. तेजस्वी ने चुनाव के दौरान ताबड़तोड़ 247 रैलियां और चार रोड शो किए.

 


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