मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बुंदेलखंड की धार्मिक नगरी ओरछा के निषाद समाज से आने वाले महेश केवट को तीसरा उम्मीदवार बनाकर बड़ा सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। रामराजा सरकार की नगरी ओरछा के महेश केवट का नाम सामने आने के बाद इसे केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने निषाद समाज को साधने के उद्देश्य से यह दांव खेला है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि पार्टी माझी, निषाद और केवट समाज के प्रतिनिधित्व को महत्व देती है।हालांकि महेश केवट की जीत का गणित आसान नहीं माना जा रहा है। राज्यसभा पहुंचने के लिए भाजपा को अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी और इसके लिए कांग्रेस के कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग अहम साबित हो सकती है। दूसरी ओर कांग्रेस की उम्मीदवार Meenakshi Natarajan की जीत का गणित अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई दे रहा है, बशर्ते कांग्रेस के विधायक एकजुट रहें।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि महेश केवट चुनाव जीत जाते हैं तो भाजपा इसे निषाद समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के रूप में प्रचारित करेगी। वहीं यदि वे चुनाव हारते हैं तो पार्टी विपक्ष, विशेषकर, पर निषाद समाज के हितों की अनदेखी का आरोप लगाने की रणनीति अपना सकती है।राज्यसभा चुनाव के इस मुकाबले ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नया रोमांच पैदा कर दिया है और अब सभी की नजरें मतदान और संभावित क्रॉस वोटिंग पर टिकी हुई हैं।


