black fungus nutrition: 11 Super Food Items Can Be Helpful In Preventing Black Fungus : आयुर्वेद के इन 11 सुपरफूड में फंगल इंफेक्शन को कम करने की ताकत, डाइट में करें शामिल

जैसा कि आप जानते हैं कि हमारे खान-पान से भी तमाम तरह की बीमारियां बढ़ती हैं। ऐसे में अगर आप कोविड से रिकवर हो चुके हैं तो इस फेज में ब्लैक फंगस से बचाव के लिए आपको अपने आहार पर भी खास तौर से ध्यान देने की जरूरत है। ब्लैक फंगस को कम करने के लिए आयुर्वेदिक डॉक्टर ने इसके लिए कुछ तरह के आहार लेने का सुझाव दिया है।
(फोटो साभार: istock by getty images)

​ आयुर्वेदिक की 11 औषधी कर सकती हैं फंगल रोकने में मदद

बेंगलुरु के जीवोत्तम आयुर्वेद केंद्र के वैद्य डॉ. शरद कुलकर्णी M.S (Ayu), (Ph.D.) ने म्यूकरमाइकोसिस से जूझ रहे लोगों को 11 चीजों के सेवन पर जोर दिया है। उन्होंने कहा अगर आप कोविड रिकवरी फेज में हैं तो इन चीजों को आहार में लेने से आपको काफी सपोर्ट मिलेगा और ब्लैक फंगस से अपना बचाव कर सकते हैं।

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​हल्दी

डॉक्टर के अनुसार, ब्लैक फंगस की बीमारी में हल्दी का सेवन आप तमाम तरीके से कर सकते हैं। इसे आप सब्जी और पुलाव में प्रयोग में करने के साथ-साथ दूध में भी मिलाकर पी सकते हैं। हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं।

इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, विटामिन के, पोटैशियम, कैल्शियम, कॉपर, आयरन, मैग्नीशियम व जि़ंक जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके सेवन से हमारे शरीर की इम्युनिटी बूस्ट होती है जिससे हम संक्रामक रोगों से अपना बचाव कर सकते हैं। हल्दी में वात-कफ दोषों को कम करने वाले गुण होते हैं और यह शरीर में खून बढ़ाने में मदद करती है। डायबिटीज के मरीज के लिए भी हल्दी का सेवन बहुत ही उपयोगी माना जाता है।

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​सौंठ या अदरक

चाय और काढ़ा में अदरक का इस्तेमाल करना तो आम बात है। लेकिन अगर आप इसे दूध में उबालकर और सब्जियों में भी प्रयोग करेंगे तो आपको कोविड और फंगल इंफेक्शन से काफी राहत मिलेगी।

​काली मिर्च

सर्दी, खांसी और जुकाम से पीड़ित लोगों को ही लिए काली मिर्च एक बेहतरीन औषधि के रूप में कार्य करती है। आयुर्वेद में भी इसके सेवन से सर्दी और जुकाम की समस्याओं को ठीक करने की बात कही गई है। फंगल इंफेक्शन में भी ये मददगार हो सकती है। आप इसे चाय और शरबत के अलावा सब्जियों में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

​आंवला

आंवला विटामिन सी का समृद्ध स्रोत माना जाता है और इसमें फाइबर भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जो पाचन को सुधारने में मदद करता है। ये इम्यूनिटी बूस्ट करने में सहायता है जिससे हमें फंगल इंफेक्शन से भी लड़ने में मदद मिल सकती है। आंवला प्राकृतिक लैग्जेटिव का काम करता है और शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को निकालता है।

​तुलसी

रिकवरी के वक्त डेली तुलसी के सेवन से भी फंगल इंफेक्शन से बचाव किया जा सकता है। तुलसी के पत्तों में विटामिन और खनिज मौजूद होते हैं। इसमें मुख्य रूप से विटामिन सी, राइबोफ्लेविन, नियासिन, कैल्शियम, जिंक और आयरन आदि पाए जाते हैं।

जिंक और विटामिन सी हमारे इम्यून सिस्टम को बूस्ट करता है। आयुर्वेद में तुलसी का प्रयोग तमाम तरह की औषधियां बनाने में किया जाता है। तुलसी में सिट्रिक, टार्टरिक एवं मैलिक एसिड भी पाया जाता है।

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​गिलोए

गिलोय का वानस्पतिक नाम टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया है, जिसे आयुर्वेद में गिलोय के नाम से जाना जाता है। संस्कृत में इसे अमृता कहा जाता है, क्योंकि यह कभी नहीं मरता है। कोविड पीरियड में तो सभी लोग रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गिलोय का इस्तेमाल खूब कर रहे हैं लेकिन रिकवरी के वक्त भी इसका प्रयोग लाभकारी होगा।

​नीम के पत्ते

बहुत से लोग नीम की पत्तियों को उसके कड़वे स्वाद की वजह से नहीं खाते। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार रोज सुबह खाली पेट नीम का सेवन करने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

आयुर्वेद के अनुसार, नीम का पत्तों के डेली सेवन करने से हम शरीर के कई विकारों को संतुलित करने में मदद मिलती है। साथ ही स्किन के लिए भी नीम बहुत ही फायदेमंद बताया गया है। नहाने में भी नीम साबुन और फेस वॉश का प्रयोग कर सकते हैं।

अश्वगंधा

अश्वगंधा का डेली सेवन चयापचय यानी मेटाबॉलिज्म सही रहता है और मोटापे की समस्या से छुटकारा मिलता है। इसमें शरीर में पैदा होने वाले हानिकारक फ्री रेडिकल्स (मुक्त कणों) को नियंत्रित करने की क्षमता होती है और ये इम्यूनिटी के लिए फायदेमंद है। साथ ही अब आयुर्वेदिक वैद्य शरद कुलकर्णी इसे फंगल इंफेक्शन में भी मददगार बता रहे हैं।

​जीरा

आम तौर पर जीरा का प्रयोग रसोई में सब्जियों में तड़का लगाने के लिए किया जाता है। लेकिन आप इसे पानी में घोलकर पीते हैं तो और भी फायदे होते हैं। जीरे में वसा, सोडियम और कोलेस्ट्रॉल में बहुत कम मात्रा में पाया जाता है। यह आहार फाइबर, थियामिन, फास्फोरस, पोटेशियम और कॉपर का भी एक अच्छा स्रोत है।

इसके साथ ही यह कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और मैंगनीज का बहुत अच्छा स्रोत है। फंगल इंफेक्शन में आपको अपनी डाइट में भुने हुए जीरा का पानी भी शामिल करना चाहिए।

​लहसुन

चूंकि ब्लैक फंगस उन लोगों को भी अपना शिकार बना रहा है जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है और लहसुन का सेवन करने से इम्यूनिटी बूस्ट होती है। लहसुन में कैल्शियम, आयरन, कॉपर, पोटेशियम और फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके यही गुण इसे उत्तम औषधि बनाते हैं।

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लौंग

आयुर्वेद में लौंग (clove) का इस्तेमाल कई तरह की जड़ी-बूटियां बनाने में किया जाता है। इसमें हानिकारक बैक्टीरिया को मारने की ताकत होती है। लौंग एक कृमिनाशक (कीड़े मारने वाली) ऐंटिफंगल, पेनकिलर होती है जो शरीर में हुए जख्मों को भरने में भी मददगार है। दांत दर्द और सांसों की बदबू से लौंग मुक्ति दिलाने के अलावा फंगल इंफेक्शन भी मददगार साबित हो सकती है।


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