Bolsonaro waters down law requiring people to wear face masks in Brazil | बोल्सोनारो हैं कि मानते नहीं, अब कोरोना संक्रमण रोकने के उपायों के खिलाफ उठाया यह कदम

रियो डी जनेरियो: कोरोना (Coronavirus) प्रभावित देशों में ब्राजील (Brazil) दूसरे नंबर पर है, लेकिन इसके बावजूद यहां के राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो (Jair Bolsonaro) को कड़े उपायों से चिढ़ है. बोल्सोनारो शुरुआत से ही इनका विरोध करते रहे हैं और अब उन्होंने बाकायदा अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए सार्वजानिक स्थानों पर मास्क (Mask) अनिवार्य करने वाले कानून को शिथिल कर दिया है. 

साओ पाउलो और रियो डी जनेरियो जैसे कई राज्यों में मास्क लगाना पहले से अनिवार्य है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इसे लागू करने के लिए कानून बनाया गया था, जिसे राष्ट्रपति ने वीटो पावर इस्तेमाल करते हुए बेअसर कर दिया है. मूल कानून में यह उल्लेख था कि वाणिज्यिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों, धार्मिक स्थलों, शिक्षण संस्थानों जैसे सार्वजानिक स्थानों पर मास्क पहनना अनिवार्य है, ताकि कोरोना संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके. लेकिन बोल्सोनारो ने इसे असंवैधानिक करार दिया.

वैसे, यह कोई पहला मौका नहीं है जब राष्ट्रपति ने लॉकडाउन (Lockdown) या मास्क लगाने जैसे नियमों का विरोध किया है. वह शुरुआत से ऐसा करते आ रहे हैं. उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) की धज्जियां उड़ाते हुए कई रैलियों में भी भाग लिया है. इसके अलावा, कई मौकों पर उन्हें बगैर मास्क भी देखा गया है. कांग्रेस को अब राष्ट्रपति के वीटो का अध्ययन करना होगा और यह तय करना होगा कि उसे बनाए रखा जाए या पलट दिया जाए. 

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वहीं, मंगलवार को एक न्यायाधीश ने अदालत के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें बोल्सोनारो के लिए सार्वजनिक स्थानों मास्क लगाना अनिवार्य किया गया था. गौरतलब है कि कोरोना वायरस के प्रकोप की शुरुआत से ही राष्ट्रपति इसे कम आंकते आये हैं. उन्होंने कोरोना को मामूली फ्लू करार दिया था. शायद यही वजह है कि ब्राजील कोरोना प्रभावित देशों में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है. यहां 61,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि संक्रमितों का आंकड़ा 1.5 मिलियन के पार पहुंच गया है.

 




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