Edited By Garima Singh | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

बहुत कुछ बर्बाद किया है कोरोना ने। जिंदगी की गाड़ी को जैसे थाम दिया है, बढ़ते सपनों को जैसे बिखेर दिया है। लेकिन इस बीच कुछ अच्छा भी किया है। वो कहते हैं ना कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं…कोरोना महामारी का अपने देश हिंदुस्तान में तबाही और संक्रमण के अलावा भी एक दूसरा पक्ष है और वह है भुला दिए गए देसी फूड्स की तरफ एका-एक लोगों का ध्यान जाना और उनके बारे में जानकारी जुटाना…
बढ़ने लगी आयुर्वेद के प्रति जागरूकता
-मेडिकल जगत में पिछले करीब 2 दशक इस तरह बीते हैं, जब लोगों के बीच आयुर्वेद को कमतर करके देखा जाने लगा था। इसकी बड़ी वजह यह थी कि अंग्रेजी दवाइयां तुरंत आराम देनेवाली, आयुर्वेद की तुलना में कुछ सस्ती और हर जगह उपलब्ध होने लगीं थी। लोग तुरंत राहत के लिए इस तरह के ट्रीटमेंट की तरफ आकर्षित होने लगे थे।
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-इस तरह के आकर्षण की एक वजह यह भी रही कि लोगों के बीच इस बात की जागरूकता नहीं थी कि इन दवाओं का घातक साइडइफेक्ट होता है। शुरुआत में भले ही ये रोग को तुरंत दबाने का काम करती हैं लेकिन बाद में कई अन्य रोगों की चपेट में आने का खतरा बना रहता है।
देसी दवाओं के प्रति बढ़ रही युवाओं में जागरूकता
ज्ञान का अभाव
-घरेलू नुस्खों और देसी दवाओं के प्रति घटती रुचि की एक वजह ज्ञान का बढ़ता अभाव भी रहा। हमारे पूर्वजों को घरेलू नुस्खों की जानकारी के साथ ही, किन स्थितियों में किस नुस्खे को अपनाना है और किसे, इस बात का भी पूरा ज्ञान था, जो कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी बढ़ने की जगह घटता चला गया। अब कोरोना ने इन नुस्खों, इनके प्रभावों और इनके लाभों के प्रति जागरूकता फैलाने का काम किया है।
फास्ट फूड से देसी लव
-हमारी युवा पीढ़ी दीवानों की तरह फास्ट फूड के पीछे चल पड़ी थी। लेकिन अब अपनी इम्युनिटी बढ़ाने के लिए ना केवल युवा देसी भोजन को प्राथमिकता दे रहे हैं बल्कि योग और ध्यान को लेकर भी सजग हो रहे हैं।
-अब युवाओं के बीच हर्बल का प्रेम साफतौर पर देखा जा सकता है। तुलसी की चाय, अदरक की चाय, जीरे का पानी, प्याज, लहसुन, दालचीनी, लौंग काली मिर्च के उपयोग को लेकर युवाओं के बीच जागरूकता बढ़ी है।
देसी ड्रिंक को दिल दे बैठे
-सोडा और कोक के पीछे दीवानी रहनेवाली हमारी जनरेशन को अचानक हल्दी का दूध (गोल्डन मिल्क) पसंद आने लगा। दूध का नाम सुनकर मुंह बनानेवाले बच्चे अब इम्युनिटी बूस्टर नाम पर फटाफट दूध पीने लगे हैं। जिन्हें दूध पहले से ही पसंद है, उनकी तो मानों चांदी ही चांदी हो गई है।
कोरोना ने समझाया घरेलू नुस्खों का महत्व
जैसे बच्चे घर लौट आए हैं
-दिल्ली के मयूरविहार स्थित एक पंतजली स्टोर के मालिक का कहना है कि जब से कोरोना का संक्रमण बढ़ा है, लोगों की क्वेरीज बहुत अधिक बढ़ गई हैं। खासतौर पर युवा गिलोय, आंवले का रस, त्रिफला चूर्ण, एलोवेरा जूस आदि की मांग करने लगे हैं। बिजनस की बात को अगर अलग रखकर बात करें, तब भी युवाओं को देसी दवाओं में दिलचस्पी दिखाते देखकर बहुत अच्छा लगता है। सच कहूं तो ऐसा अहसास होता है, मानों बच्चे घर लौट आए हैं!
आयुष मंत्रालय की है बड़ी भूमिका
-अंग्रेजी दवाओं से साइड इफेक्ट्स से बचाते हुए युवाओं को काढ़ा, घरेलू औषधियां, देसी दवाओं के प्रति जागरूकता और रुचि जगाने का श्रेय आयुष मंत्रालय को बहुत अधिक जाता है। क्योंकि हमारे देश का युवा भले ही घर के बुजुर्गों की बात पर ध्यान ना दे। लेकिन जब आयुष मंत्रालय की तरफ से कोई भी बात कही जाती है तो युवा उसे पूरी तरह मानते हैं।
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