Brazil president Jair Bolsonaro says death was everyones destiny |ब्राजील में कोरोना से होने वाली मौतों पर राष्ट्रपति के असंवेदनशील बोल, कहा ‘मौत तो सबकी नियति है’

नई दिल्ली: ब्राजील (Brazil) में कोरोना वायरस (Coronavirus) की रफ्तार अपने चरम पर है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यहां रविवार को कोरोना वायरस के 17,110 नए मामले सामने आए और 612 मौतें हुईं, जिससे ब्राजील के कुल मामले 867,624 पर पहुंच गए और मरने वालों की संख्या 43,332 हो गई है.

बता दें कि ब्राज़ील में COVID-19 की मृत्यु दर पांच प्रतिशत है. यहं करीब 388,500 लोग बीमारी से ठीक हो गए हैं. 

रायटर की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे विश्व में लैटिन अमेरिका कोरोना वायरस के सबसे खराब हॉटस्पॉट के रूप में उभरा है, जिसमें पेरू, इक्वाडोर, चिली और पनामा जैसे राष्ट्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.

ब्राजील के दक्षिणपंथी राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो (Jair Bolsonaro) हमेशा से वायरस के खतरे को कमतर आंकते आए हैं और उन्होंने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया. समय-समय पर वो कोरोना के प्रति अपने असंवेदनशील रवैए के सुबूत भी देते आए हैं. इसी कड़ी में कोरोना वायरस पर हुई मौतों पर उन्होंने कहा कि ‘मौत तो सबकी नियति है’.

उनके घर के बाहर खड़े समर्थकों को जब ये विश्वास दिलाया जा रहा था कि बोलसोनारो ब्राजील को बदलकर रख देंगे, तब एक महिला ने बोलसोनारो से सवाल किया कि- ‘और जो इस वक्त मातम मना रहे हैं, जिनकी संख्या बहुत ज्यादा है, उनक बारे में आप क्या कहेंगे?’

तो बोलसोनारो ने कहा कि उन्हें लोगों की मौत का अफसोस है लेकिन ये तो सभी को आनी है, ये सबकी नियति है. उन्होंने ये भी कहा कि वो एक भी ऐसा मामला नहीं जानते जब ब्राजील के लोगों की देखभाल या फिर वेंटिलेटर की कमी से मौत हुई हो. उन्होंने ये बात फिर दोहराई कि इस वायरस से तो हर कोई संक्रमित होगा. इसलिए लोगों में आतंक पैदा करने के लिए प्रेस की कोई जरूरत नहीं है.

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बता दें कि बता दें कि कोरोना वायरस के संक्रमण और मौत के मामले में ब्राजील दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है. ब्राजील के मुख्य शहर साओ पाउलो में तो हालात ऐसे हैं कि शवों को दफनाने के लिए कब्रिस्तान में जगह ही नहीं बची है. इसलिए, प्रशासन पुराने शवों को खोदकर संक्रमित मरीजों के शवों को दफना रहा है. बताया जा रहा है कि पुराने कब्रों के अवशेषों को एक बड़े कंटेनर में इकठ्ठा किया जा रहा है. 15 दिनों के बाद इन अवशेषों को दूसरे कब्रिस्तानों में दफन कर दिया जाएगा.




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