गुना में छात्रों के बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर छात्र संगठन डीएसओ ने मोर्चा खोल दिया है। निजी बसों का किराया बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों से स्कूल और कॉलेज आने वाले छात्र-छात्राओं की परेशानियां बढ़ गई हैं। संगठन का कहना है कि महंगे सफर के कारण गरीब परिवारों के बच्चों के सामने अब पढ़ाई जारी रखने का संकट खड़ा हो रहा है। इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को डीएसओ जिला काउंसिल के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधीश के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन ने प्रदेशभर के विद्यार्थियों के लिए नि:शुल्क बस पास की सुविधा लागू करने और प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में बस सुविधा के नाम पर वसूली जा रही अतिरिक्त फीस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
शिक्षा के अधिकार की बात करने वाली व्यवस्था में अगर स्कूल और कॉलेज पहुंचना ही गरीब परिवारों के बच्चों के लिए महंगा पड़ने लगे, तो सवाल उठना लाजिमी है। ग्रामीण क्षेत्रों से शहर आकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के सामने आज दोहरी चुनौती है। एक तरफ शिक्षा का खर्च, दूसरी तरफ रोजाना आने-जाने के लिए बढ़ता बस किराया। ऐसे में सवाल यह है कि क्या आर्थिक तंगी के कारण किसी विद्यार्थी की पढ़ाई बीच में छूटनी चाहिए? इसी सवाल को लेकर छात्र संगठन डीएसओ ने गुना में आवाज बुलंद की है।डीएसओ जिला काउंसिल के अध्यक्ष शुभम राव के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन के सामने विद्यार्थियों की समस्याएं रखीं।
ज्ञापन में मांग की गई कि मध्य प्रदेश सरकार छात्रों को नि:शुल्क बस पास उपलब्ध कराए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को महंगे किराए से राहत मिल सके।संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा निजी बस संचालकों को प्रति किलोमीटर दो रुपये तक किराया बढ़ाने की अनुमति दिए जाने से छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। खासकर उन विद्यार्थियों की परेशानी ज्यादा है, जो रोजाना गांवों से शहर के स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने आते हैं। उन्हें प्रतिदिन आने-जाने के लिए किराया देना पड़ता है। महीनेभर में यही खर्च गरीब परिवारों के बजट पर भारी पड़ने लगता है।डीएसओ का कहना है कि कई परिवार पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ऐसे में बस किराए में बढ़ोतरी उनके लिए अतिरिक्त परेशानी बन गई है।
संगठन ने चिंता जताई कि अगर विद्यार्थियों को परिवहन सुविधा में राहत नहीं मिली, तो कुछ छात्र आर्थिक मजबूरी के चलते अपनी पढ़ाई छोड़ने तक के लिए विवश हो सकते हैं।डीएसओ ने मांग की है कि सरकार विद्यार्थियों की समस्याओं को केवल ज्ञापन तक सीमित न रखे, बल्कि उन्हें राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए। संगठन के मुताबिक, देश के कई अन्य राज्यों में छात्रों को नि:शुल्क बस पास की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। ऐसे में मध्य प्रदेश में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि आर्थिक स्थिति किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बने। संगठन ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया है। उसका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए सुलभ और किफायती परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
वहीं, डीएसओ ने सांदीपनि स्कूलों की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि 15 किलोमीटर के दायरे में केवल एक स्कूल खोले जाने और आसपास के ग्रामीण स्कूलों को बंद किए जाने के कारण विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए दूर-दराज जाना पड़ रहा है। इससे न केवल उनका समय अधिक खर्च होता है, बल्कि आने-जाने का आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।छात्र संगठन ने गुना के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में बस सुविधा के नाम पर कथित अतिरिक्त वसूली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। संगठन के अनुसार, कॉलेज में डेढ़ हजार से अधिक विद्यार्थियों से प्रति छात्र 365 रुपये वार्षिक अतिरिक्त फीस ली जा रही है। डीएसओ का आरोप है कि विद्यार्थियों से बस सुविधा के नाम पर राशि वसूली जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें अपेक्षित बस सुविधा नहीं मिल रही है। सं
गठन ने इस वसूली पर तत्काल रोक लगाने, फीस के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने और विद्यार्थियों को वास्तविक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। छात्र संगठन का कहना है कि यदि विद्यार्थियों से किसी सुविधा के नाम पर शुल्क लिया जाता है, तो उसके बदले संबंधित सुविधा भी मिलनी चाहिए। इस मामले में कॉलेज प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।डीएसओ ने प्रशासन से मांग की है कि बस किराए में बढ़ोतरी से प्रभावित विद्यार्थियों को राहत देने के लिए सरकार तक उनकी मांग पहुंचाई जाए। साथ ही प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में बस शुल्क के मामले की जांच कराकर उचित कार्यवाही की जाए।
बाइट – प्रीति श्रीवास्तव जिला सचिव AIDSO गुना


