Central Vista Project: Supreme Court kept land use changes petition pending – सेंट्रल विस्टा केस : SC ने लैंड यूज की याचिका रखी लंबित, कहा- वैधता पर फैसला आने के बाद करेंगे सुनवाई

सेंट्रल विस्टा केस : SC ने लैंड यूज की याचिका रखी लंबित, कहा- वैधता पर फैसला आने के बाद करेंगे सुनवाई

सेंट्रल विस्टा की वैधता को लेकर मामला अभी लंबित : सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

सेंट्रल विस्टा (Central Vista) मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने लैंड यूज की याचिका को फिलहाल लंबित रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेंट्रल विस्टा की वैधता को लेकर मामला अभी लंबित है. उस पर फैसला आने के बाद ही इस मामले में सुनवाई करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका पर नोटिस जारी करने की मांग भी ठुकरा दी है. याचिकाकर्ता राजीव सूरी ने डीडीए के उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी है जिसमें लैंड यूज बदलते हुए दफ्तर को प्रधानमंत्री आवास में बदल दिया था. 

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सात दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उसे शिलान्यास करने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक कोई निर्माण, तोड़फोड़ या पेड गिराने का काम ना हो. इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा था. सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि ये प्रोजेक्ट कानून के मुताबिक है या नहीं. प्रोजेक्ट पर रोक लगाई जाए या नहीं. 

वहीं, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 20 हजार करोड़ रुपये के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पैसे की बर्बादी नहीं है, बल्कि इससे पैसों की बचत होगी. इस प्रोजेक्ट से सालाना करीब एक हजार करोड़ रुपये की बचत होगी, जो फिलहाल दस इमारतों में चल रहे मंत्रालयों के किराये पर खर्च होते हैंय साथ ही इस प्रोजेक्ट से मंत्रालयों के बीच समन्वय में भी सुधार होगा. 

जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वर्तमान संसद भवन गंभीर आग और जगह की भारी कमी का सामना कर रहा था. उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट के तहत हैरिटेज बिल्डिंग को संरक्षित किया जाएगा. मेहता ने कहा कि मौजूदा संसद भवन 1927 में बना था. जिसका उद्देश्य विधान परिषद के भवन का निर्माण था न कि दो सदन का था. उन्होंने कहा कि जब लोकसभा और राज्यसभा का संयुक्त सत्र आयोजित होती हैं, तो सदस्य प्लास्टिक की कुर्सियों पर बैठते हैं.  इससे सदन की गरिमा कम होती है.  

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मेहता ने कहा कि नए संसद भवन की समयसीमा 2022 है. उन्होंने कहा कि संसद का स्वामित्व लोकसभा सचिवालय के पास रहेगा. कई लोकसभा अध्यक्षों के अलावा अन्य लोगों ने यह संकेत दिया था कि वर्तमान संरचना अपर्याप्त है. मेहता ने यह भी कहा कि नई संसद होनी चाहिए या नहीं, यह एक नीतिगत निर्णय है, जो सरकार को लेना होता है.   

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र द्वारा विस्टा के पुनर्विकास योजना के बारे में भूमि उपयोग में बदलाव को अधिसूचित करने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. केंद्र की ये योजना 20 हजार करोड़ रुपये की है. 20 मार्च, 2020 को केंद्र ने संसद, राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक जैसी संरचनाओं द्वारा चिह्नित लुटियंस दिल्ली के केंद्र में लगभग 86 एकड़ भूमि से संबंधित भूमि उपयोग में बदलाव को अधिसूचित किया.

 


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