chat corners transformed into vegetable pushcarts in lockdown in chhattisgarh

चाट ठेलों ने व्यवसाय बदला.

चाट ठेलों ने व्यवसाय बदला.

कोरोना संकट के समय में लॉकडाउन के चलते दैनिक रूप से कमाई कर परिवार पालने वालों के सामने बड़ी समस्याएं खड़ी हुईं क्योंकि ज़रूरी सेवाओं के अलावा सारे धंधे बंद हो गए हैं.

सूरजपुर. ज़िले में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के चलते एक बार फिर लॉकडाउन के हालात बने हुए हैं. 13 अप्रेल से आगामी 5 मई तक ज़िले में ज़रूरी सेवाओं को छोड़ सभी काम बंद हैं. ऐसे में नगरपालिका सूरजपुर के चौपाटी में रोज़ कमाने, खाने वाले चाट ठेले वालों के लिए रोज़ी रोटी का संकट खड़ा हुआ. ये लोग अब फिर से ठेला लेकर गलियों में घूम रहे हैं लेकिन अब इनके ठेलों में चाट, समोसे नहीं बल्कि सब्ज़ियां और फल नज़र आ रहे हैं. सूरजपुर ज़िलें में ठेला व्यवसायी फिर लॉकडाउन का शिकार हो चुके हैं. ज़िला प्रशासन की लॉकडाउन गाइडलाइनों के मुताबिक 5 मई तक सभी दुकानें बंद रखी जाना हैं और सब्ज़ी विक्रेता भी सुबह 6 बजे से 12 बजे तक के बीच ही गली मुहल्लों में घूमकर कोविड नियमों का पालन करते हुए ही सब्ज़ी बेच सकते हैं. ये भी पढ़ें : एयरलिफ्ट कर रायपुर लाये गये टैंकर, भिलाई में ऑक्सीजन फिलिंग के बाद जाएंगे इंदौर कैसे चाट कॉर्नर बनी सब्ज़ी का ठेला?इन हालात में ज़्यादातर तो ​यही दिख रहा है कि नगरपालिका सूरजपुर में रोज़ाना चौपाटी में जो चाट समोसे के ठेले लगते थे, वो घरों के बाहर बंद खड़े हैं और लॉकडाउन खत्म होने का इंतज़ार कर रहे हैं. लेकिन आर्थिक संकट से जूझने वाले कुछ ठेले वालों की कहानी ये भी है कि उन्होंने अपना रोज़गार बदल लिया है. ये भी पढ़ें : चिता पर महिला के ज़िंदा पाए जाने के मामले को रायपुर के अस्पताल ने बताया ‘वहम’

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चाट के ठेले सब्ज़ियों के ठेले में बदले नज़र आ रहे हैं.

ऐसे ही एक विक्रेता रामसिंह ने पिछले साल के लॉकडाउन में भी हिम्मत नहीं हारी थी और चाट फुल्की के ठेले को सब्ज़ी बेचने का ठेला बना लिया था. एक बार फिर वही नौबत आने पर इस बार भी रामसिंह ने अपने ठेले को सब्ज़ी बेचने का रास्ता बना लिया है. रामसिंह ही नहीं, ऐसे और भी हैं, जो ​अपने परिवार का पेट पालने के लिए चाट आदि का व्यवसाय छोड़ने पर मजबूर हुए हैं.








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