- राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पेश किया साल 2020-21 का बजट
- प्रदेश में मांग बढ़ने की उम्मीद, कुछ समय के लिए मजबूत होगी क्रय शक्ति
Dainik Bhaskar
Mar 03, 2020, 05:24 PM IST
रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार का दूसरा बजट पेश किया। कई छोटी-बड़ी योजनाओं से हर वर्ग को साधने का प्रयास इस बजट में दिख रहा है। राज्य सरकार किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के जरिए पैसे देगी। इसके लिए 5100 करोड़ का प्रावधान है। पिछले दिनों राज्य में हुई धान खरीदी में किसानों से धान 1815 रुपए प्रति क्विंटल कर दर से लिया गया, जबकि वादा 2500 रुपए प्रति क्विंटल देने का था अब अंतर की राशि को न्याय योजना से भुगतान किया जाएगा।
प्रदेश के किसानों के लिए की गई इस पहल से व्यापारी खुश हैं, उन्हें उम्मीद है कि जब किसानों के हाथ में पैसा आएगा तो बाजार मजबूत होगा। अर्थशास्त्री डॉ रविंद्र ब्रम्हे कहते हैं कि डायरेक्ट कैश हाथ में ट्रांसफर होगा तो मांग बढ़ेगी, क्रय शक्ति में इजाफा होगा। अर्थशास्त्र के सह प्राध्यापक डॉ बीएल सोनेकर ने इसे मरहम बताया इलाज नहीं, अर्थात यह कदम राहत जरूर देंगे, मगर दीर्घकालीक विकास को मजबूत नहीं करते।
बाजार को फायदा मिलेगा
छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र बरलोटा ने बताया कि सरकार किसानों को पैसा देगी इससे बाजार को फायदा मिलेगा। पिछली बार जब सरकार ने किसानों को बोनस दिया था तब खरीदारी बढ़ी थी देश के मुकाबले राज्य में मंदी का असर कम था। कॉन्फेडेरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडस के अमर पारवानी ने बताया कि सरकार कुछ जगहों पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर भी काम कर रही है। अब तक रायपुर और बिलासपुर में ही बाहर से आने वाले लोग केंद्रित हो जाया करते थे। प्रदेश के अन्य हिस्सों के विकास से हमें ओवरऑल कारोबार जगत के विकास की उम्मीद है। उद्योगों के लिए सब्सीसी, लैंड लीज में छूट का प्रावधान सकारात्मक बदलाव लेकर आएंगे।
राजस्व व्यय बढ़ा, पड़ेगा विकास पर असर
सरकार ने अपना राजस्व व्यय पिछली बार की अपेक्षा बढ़ा दिया है। डॉ रविंद्र ब्रम्हे के मुताबिक यह अच्छे फायनेंशियल मैनेजमेंट का तरीका नहीं माना जाता। राजस्व सरकार की आय होता है, जो जनता से प्राप्त होता है। पिछली बार सरकार ने राजस्व व्यय 78 हजार 595 करोड़ रुपए किए थे। यह बढ़कर 81 हजार 400 करोड़ रुपए होने का अनुमान रखा गया है। यह खर्च वेतन आदि में होता है। इस खर्च से शासन को फायदा नहीं होता। पूंजीगत व्यय जिनसे सरकार की आय के साधन बढ़ते हैं, या संपत्ती बढ़ती है उनमें राजस्व व्यय की तुलना में बेहद कम व्यय किया गया है। इनमें पिछली बार पूंजीगत व्यय 12 हजार 110 करोड़ रुपए थे, इस बार बढ़कर यह महज 13 हजार 814 करोड़ हुआ है।
सरकार के पेश किए मौजूदा बजट में आर्थिक क्षेत्र में कम खर्च का प्रावधान है। आर्थिक क्षेत्र सरकार को आर्थिक रूप से मजबूती भी देते हैं। इनमें परिसंपति कर निर्माण होता है। डॉ बीएल सोनेकर ने बताया कि आर्थिक क्षेत्र के व्यय से सरकार की आय भी होती है। पिछली बार सरकार ने अपने बजट का 44 प्रतिशत इसमें खर्च करने की बात कही थी। इस बार इसे घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है। दूसरी तरफ सामाजिक क्षेत्र में व्यय जिसमें योजनाएं बनाना, लोगों को मुफ्त सुविधाएं या सामग्री वगैरह देने का काम होता है इसे बढ़ाया गया है। पिछली बार सरकार ने सामाजिक क्षेत्र में 36 प्रतिशत खर्च किया इस बार यह 38 प्रतिशत होने का अनुमान है।
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