- बीजापुर में सोमवार को हुई थी सीआरपीएफ जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़
- राजनांदगांव निवासी पूर्णानंद और यूपी निवासी विकास कुमार हुए थे शहीद
- शहीद पूर्णानंद साहू का अंतिम संस्कार आज, उनके गृहग्राम जंगलपुर में
Dainik Bhaskar
Feb 11, 2020, 12:05 PM IST
राजनांदगांव. छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के पामेड़ इलाके में हुई नक्सल मुठभेड़ में शहीद हुए जवान पूर्णानंद साहू की शादी एक महीने बाद होने वाली थी। 6 मार्च को सगाई और 27 मार्च से पूर्णानंद की शादी तय हो चुकी थी। परिजन शादी की तैयारी में जुटे थे। घर में रंगाई-पुताई का काम भी चल रहा था। अचानक दोपहर में घायल होने की खबर परिजनों को मिली। देर शाम तक शहादत की खबर परिवार में मातम लेकर आई। पूर्णानंद शादी की तैयारियों के लिए छुट्टी लेकर घर लौटने वाला था। इसके पहले ही वह नक्सलियों की गोली से शहीद हो गए।
शहर से लगे ग्राम जंगलपुर निवासी जवान पूर्णानंद साहू सोमवार को अपनी टीम के साथ सर्च ऑपरेशन पर निकले थे,जहां नक्सलियों की ओर से पार्टी पर फायरिंग की गई। करीब घंटेभर चली मुठभेड़ में पूर्णानंद व उनके कुछ साथियों को गोली लगी। इसमें पूर्णानंद साहू शहीद हो गए। 27 वर्षीय पूर्णानंद का चयन 2013 में सीआरपीएफ के लिए हुआ था, लंबे समय से पूर्णानंद बीजापुर इलाके में तैनात थे। मंगलवार को शहीद जवान के शव को गृहग्राम जंगलपुर लाया जाएगा, जहां पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार होगा।
रिक्शा चलाकर पिता ने पढ़ाया
पूर्णानंद के चाचा प्रकाश ने बताया कि पूर्णानंद सीआरपीएफ में कोबरा कमांडो थे। नीमच में ट्रेनिंग के बाद जगदलपुर के करनपुर में पोस्टिंग थी। वहीं उनका हेडक्वार्टर था। पूर्व में अनंतनाग में पूर्णानंद पदस्थ रहे। उस दौरान पत्थरबाजी में पूर्णानंद को चोट भी लगी थी। शहीद के पिता रिक्शा चालक थे। इससे होने वाली कमाई से ही बेटे की परवरिश की और पढ़ाया। पूर्णानंद के परिवार के सदस्यों और दोस्तों ने बताया कि वह दिवाली और फिर नए साल के दौरान छुट्टी पर आए थे, यही उनकी पूर्णानंद के साथ आखिरी मुलाकात थी।
दो बहन व छोटे भाई की पढ़ाई का उठा रहा था खर्च
जवान पूर्णानंद तीन बहन और एक छोटा भाई भी है। इनमें एक बहन की शादी हो चुकी है। जबकि दो बहन और भाई की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी पूर्णानंद पर ही थी। परिजनों ने बताया कि घर की कमजोर आर्थिक स्थिति को नौकरी लगने के बाद पूर्णानंद ने ही सहारा दिया था। छोटे भाई बहनों की पढ़ाई का पूरा खर्च वही वहन कर रहे थे। लेकिन नक्सलियों के इस कायराना घटना से एक बार फिर इस परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
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